अब तक सफर में तालों की नगरी लगातार न सिर्फ आगे बढ़ रही है, बल्कि स्मार्ट भी हो चली है। यहां के ताले अब इंटरनेट से ऑपरेट होने लगे हैं। इंसानी हाथों के इशारों पर रोबोटिक आधुनिक तालों को गढऩे लगे हैं। चार मंजिल ऊंची इमारतें 16 मंजिल तक सीढिय़ा चढ़ चुकी हैं। शहर में नामचीन होटल देश-विदेश से आने वाले मेहमानों को लजीज व्यंजन परोस रहे हैं। धनीपुर एयरपोर्ट से लखनऊ और आजमगढ़ तक की हवाई उड़ान जारी है। शहर के चारों ओर फोरलेन हाइवे पर वाहन फर्राटा भर रहे हैं। यह फोरलेन आने वाले समय में छह और आठ लाइन में परिवर्तित होंगे। शहर के चौराहे इतने स्मार्ट हो चले हैं। जिनके एड्वांस्ड कैमरे सडक़ पर ड्राइवर के हाथों की घड़ी का डायल तक देख सकते हैं। इन कैमरों के साथ ही वॉइस बाक्स लगा दिए गए हैं। जिनके माध्यम से कोई भी मदद मांगी जा सकती है।
शहर का दायरा चारों ओर लगभग पांच किलोमीटर तक व्यवस्थित ढंग में आगे बढ़ रहा है, जबकि इसके अलावा भी दूर दराज तक अपार्टमेंट और कालोनियों के रूप में गांव तब्दील हो रहे हैं। जिसमें रामघाट रोड, मुरादाबाद हाइवे, आगरा रोड, अलीगढ़ पलवल रोड, अलीगढ़ दिल्ली हाइवे, मथुरा रोड, कानपुर हाइवे के सहारे नई-नई कालोनियां और अपार्टमेंट सहित उद्योग धंधों से सभी सुविधाएं इंसानों ने एकत्रित कर ली हैं। रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट और एक्सीलेरेटर की सुविधा हो गई है। इतना ही नहीं, राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय और डिफेंस कॉरिडोर, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, ई-बस सेवा जैसे प्रोजेक्ट न सिर्फ अलीगढ़ में रोजगार पैदा कर रहे हैं। बल्कि इन प्रोजेक्ट के सहारे अलीगढ़ का भी विकास हो चला है। इसीलिए अब अलीगढ़ स्मार्ट होने लगा है।
बैंकों का टर्नओवर पहुंचा 45 हजार करोड़ के आसपास
आज से 18 साल पहले जनपद की बैंकों का टर्नओवर छह हजार करोड़ के आसपास था। जो अब 45 हजार करोड़ सालान तक जा पहुुंचा है। डिजिटल लेनदेन के मामले में भी अलीगढ़ काफी आगे बढ़ चुका है। सब्जी की ढकेल से लेकर रोजमर्रा की दैनिक वस्तुएं अब ग्राहक अपने स्मार्ट फोन के जरिए खरीद रहे हैं।