अलीगढ़। प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना काल में दर्ज हुए मुकदमों की वापसी किए जाने के फैसले पर कांग्रेसी नेताओं ने संदेह जताया है।
कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि इससे आम जनता को तो राहत मिलेगी लेकिन गैर भाजपाई दलों के पूर्व जनप्रतिनिधियों को कोई राहत नहीं मिलेगी क्योंकि अधिकांश मुकदमे उन पर दर्ज हुए हैं। सत्ताधारी पार्टी के जनप्रतिनिधियों पर कोई मुकदमा ही दर्ज नहीं हुआ। अलीगढ़ में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के हरियाणा के प्रभारी और पूर्व विधायक विवेक बंसल सहित दर्जनों कांग्रेसी नेताओं पर कोरोना कॉल के दौरान मुकदमे दर्ज हुए हैं।
कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि प्रदेश सरकार मान रही है कि महामारी के दौर में सत्ताधारी पार्टी के जनप्रतिनिधि राहत कार्य कर रहे थे और अन्य दलों के नेता महामारी एक्ट का उल्लंघन कर रहे थे।
महामारी के दौरान जो मुकदमे दर्ज हुए हैं उसमें वापस लेने में सरकार ने भेदभाव जाहिर किया है। सरकार की मंशा इस को लेकर गैर भाजपाई राजनीतिक दलों के प्रति विद्वेष की है। क्योंकि महामारी के दौरान अलग-अलग राजनीतिक दलों में राजनीति से ऊपर उठकर समाज के प्रति अपने दायित्व को समझते हुए अपने काम को अंजाम दिया
- विनोद पांडे, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता
अलीगढ़ में कांग्रेसी नेताओं ने महामारी के दौरान राहत कार्य किया। कुछ कांग्रेसी नेताओं ने लगातार जरूरतमंदों को भोजन का वितरण किया। साबुन सैनिटाइजर खाद्य सामग्री प्रदान की। इसके बाद भी 50 से अधिक कांग्रेस नेताओं के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा मुकदमे दर्ज किए गए। वह मुकदमे अब इसलिए वापस नहीं हो पाएंगे क्योंकि राहत कार्य करने वाले कांग्रेसी नेता थे। यह भेदभाव पूर्ण है
-यज्ञा अग्रवाल, कांग्रेसी नेता
विनोद पांडे, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता
- फोटो : Amar Ujala
विनोद पांडे, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता