महिला अस्पताल में जमीन पर लेटी प्रसूता और नवजात शिशु
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कमल का कहना था कि काफी देर से उसकी पत्नी राधा और नवजात शिशु आपातकालीन वार्ड के बाहर गर्मी में जमीन पर लेटे थे। पहले छुट्टी के लिए कागजी कार्यवाही, फिर एंबुलेंस बुलाने तक दोपहर हो गई थी। फिर कंट्रोल रूम फोन करता तो और समय लगता। इसलिए उसने 2200 रुपये अपनी बुआ से उधार लेकर कार बुलाई। करीब 40 मिनट बाद जब अस्पताल परिसर में कार पहुंची तो उस वक्त भी आसपास छह एंबुलेंस खड़ी थीं लेकिन कमल और उसके परिवार के लिए इनमें से कोई भी काम नहीं आईं और न ही इनके किसी चालक या परिचालक ने मदद करना उचित समझा।
यह घटना मेरे संज्ञान में नहीं है। संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जाएगी। अगर दोषी पाए गए तो इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।-तैय्यब खान, सीएमएस, महिला अस्पताल
एंबुलेंस की सेवा निशुल्क है। कंट्रोल रूम से सूचना मिलने के बाद एंबुलेंस पहुंचती है। अगर पास में कोई एंबुलेंस है तो कंट्रोल रूम में बात करा सकते हैं। इस घटना में क्या हुआ है? इसके बारे में जानकारी करके अवगत कराऊंगा।-अरशद, एंबुलेंस प्रभारी
102 एंबुलेंस सेवा की जिम्मेदारी
- जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं, प्रसूताओं और दो वर्ष तक के बच्चों के लिए निशुल्क परिवहन सेवा।
- सेवा लेने के लिए 102 पर कॉल या कंट्रोल रूम से संपर्क करना होता है।
- कॉल मिलने के बाद कंट्रोल रूम उपलब्ध और निकटतम एंबुलेंस को ड्यूटी आवंटित करता है।
- घर से अस्पताल, रेफरल अस्पताल और अस्पताल से घर तक निशुल्क परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
- कंट्रोल रूम से ड्यूटी मिलना अनिवार्य है। यदि मरीज के पास पहले से एंबुलेंस खड़ी है, तो कंट्रोल रूम उसी वाहन को ड्यूटी आवंटित कर सकता है। इसके लिए कॉलर को इसकी जानकारी कंट्रोल रूम को देनी होती है।