शीतलहर के चलते अस्थमा, निमोनिया, सर्दी, खांसी, जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अकेले मलखान सिंह जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 250 से अधिक बीमारी से ग्रसित बच्चे पहुंच रहे हैं। दीनदयाल संयुक्त अस्पताल व प्राइवेट अस्पतालों में भी बीमार बच्चों की भरमार है। चिकित्सक बच्चों, बड़ों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. नीता कुलश्रेष्ठ का कहना है कि इन दिनों अस्थमा, निमोनिया, सर्दी, खांसी, जुकाम के मरीज बच्चों की संख्या बढ़ गई है। इस वक्त बच्चों को ठंड से बचाकर रखना बहुत जरूरी है। इसके साथ पर्सनल हाइजीन यानी साफ सफाई का ध्यान रखें। बच्चों के सिर, पैर आदि अच्छी तरह ढककर रखें। स्वास्थ्यवर्धक और पर्याप्त भोजन कराएं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप बंसल ने बताया की बच्चों को च्यवनप्राश और हल्दी वाला दूध जरूर दें। दूध में एक से लेकर चार खजूर उबालकर उस दूध को बच्चों को पिलाएं। बच्चों के लिए एक खजूर और बड़ों के लिए चार से पांच खजूर का प्रयोग कर सकते हैं। तिल और गुड़ वाले लड्डू, मूंगफली भी ठंड का असर कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बेहतर उपाय है। कच्चे आंवले का प्रयोग किसी न किसी रूप में किया जाए।
ठंड ने बढ़ाया दिल का दर्द
सर्दी बढ़ने के साथ दिल के रोगियों की दिक्कत बढ़ गई है। जिला अस्पताल में हृदय रोगी काफी संख्या में पहुंच रहे हैं। यहां रोजाना 50 से 60 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें से ज्यादातर हाई ब्लड प्रेशर और सीने में दर्द व सांस लेने में परेशानी की शिकायत वाले होते हैं। चूंकि यहां कार्डियक फिजीशियन नहीं हैं, इसलिए मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर या किसी दूसरे अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है। प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अथहर कमाल ने बताया कि सर्दी बढ़ने के साथ दिल के रोगियों की परेशानी भी बढ़ने लगती है। गर्मियों में और सामान्य मौसम में दिल के रोगियों को कोई खास परेशानी नहीं होती।