एडीजे पॉक्सो न्यायालय प्रथम के न्यायाधीश ओमवीर की अदालत से महिला की हत्या में आरोपी दो सगे भाइयों को उम्रकैद व जुर्माने की सजा सुनाई गई है। खास बात है कि इस मामले में मुख्य गवाह यानी मुकदमे का वादी पक्षद्रोही हो गया। मगर, न्यायालय ने मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर सजा सुनाई है और वादी के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
एडीजीसी संजय शर्मा व लव बंसल के अनुसार, क्वार्सी के गांव बरहेती निवासी नवाब सिंह ने 18 जून 2003 को यह मुकदमा थाने में दर्ज कराया कि वह शाम को अपनी पत्नी मुन्नी देवी संग खेत की निराई कर रहा था। तभी नामजद हमलावरों ने रंजिशन वहां आकर रुपये के लेनदेन का हिसाब करने के नाम पर गाली गलौज शुरू कर दी।
इस दौरान एक हमलावर ने नवाब सिंह पर तमंचे से फायर किया। इसी बीच उसकी पत्नी आगे आ गई और गोली पेट में लगने से मुन्नी जख्मी हो गई, जिसे तत्काल जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई।
इससे पहले उसने अपने मृत्यु पूर्व बयान भी एसीएम को दर्ज कराए। इस मामले में गांव के हरी सिंह उसके बेटे दिनेश व अशोक को नामजद किया गया। सत्र परीक्षण के दौरान मृत्यु पूर्व बयान, विवेचक के बयान, मृत्यु पूर्व बयान लेने वाले अधिकारी अपने बयान पर कायम रहे, जबकि वादी यानी नवाब सिंह तहरीर में लिखे गए बयान पर कायम नहीं रह सका।
इस बीच हरी सिंह की मौत हो गई। न्यायालय ने मामले में मृत्यु पूर्व बयान को आधार मानकर दो आरोपियों दिनेश व अशोक को उम्रकैद व 70-70 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। वहीं वादी नवाब सिंह के खिलाफ धारा 344 के तहत प्रकीर्ण वाद दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।