पिसावा क्षेत्र के गांव रूप नगर में महिला को केरोसिन डालकर जिंदा जलाकर मारने की घटना में पति-सास सहित तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा से दंडित किया गया है। मिशन शक्ति अभियान के तहत यह फैसला एडीजे-16 मो. नसीम की अदालत से सुनाया गया है। खास बात यह है कि इस सनसनीखेज घटना को महिला के भाई के सामने ही अंजाम दिया गया था और उसने खुद की जान भागकर बचाई थी।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी गोपाल सिंह राणा के अनुसार, घटना 9 नवंबर 2018 की है। वादी जमालपुर सिया गभाना के बसंत कुमार की ओर से पिसावा थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसमें कहा था कि उन्होंने अपनी बेटी सुलेखा की शादी 5 मई 2011 को रूप नगर के देवेंद्र सिंह संग की।
शादी के बाद से ही ससुराल में उसे तंग किया जाने लगा। यहां तक कि नोएडा में ड्राइवर की नौकरी करने वाले देवेंद्र ने सुमन नाम की दूसरी महिला से शादी कर ली। इसके बाद उत्पीड़न और बढ़ गया। आठ नवंबर 2018 को सुलेखा भाई दूज पर मायके आई और उसने पूरी बात बताई।
नौ नवंबर को उसका भाई उसे ससुराल छोड़ने गया, जहां ससुरालियों ने सुलेखा को भाई के सामने ही पीटा और केरोसिन डालकर आग लगा दी। इस दौरान भाई ने भागकर जान बचाई। खबर पर पहुंची पुलिस ने महिला को जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, जहां पुलिस ने उसके बयान भी दर्ज किए।
10 नवंबर को महिला की मौत हो गई। इस मुकदमे में पति देवेंद्र के अलावा देवर लोकेश, सास हीरा देवी, ननद गुड़िया, चचिया ससुर देशराज व ससुर राजवीर सिंह को नामजद किया गया। पुलिस विवेचना में पति, देवर व सास के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान साक्ष्यों व गवाही के आधार पर दोषियों को उम्रकैद व 20-20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
- मिशन शक्ति अभियान के तहत यह फैसला सुनाया गया है। अदालत में हमारी ओर से इस जघन्य अपराध में कठोरतम सजा का अनुरोध किया था। न्यायालय ने अभियोजन की अपील पर उम्रकैद की सजा सुनाई है। फैसला स्वागत योग्य है। - गोपाल सिंह राणा, एडीजीसी।
शादी के बाद नहीं हुई संतान
इस मामले में एक तथ्य यह भी है कि महिला के शादी के बाद संतान नहीं हुई थी। पुलिस जांच व सत्र परीक्षण में इस तरह के तथ्य भी सामने लाए गए कि पति महिला से खुश नहीं था। इसीलिए उसे अपने साथ नोएडा नहीं ले गया और ससुराल में उसका उत्पीड़न होता रहा।
महिला को बेहोश कर दुष्कर्म में आठ वर्ष की सजा
गोंडा क्षेत्र में महिला को प्रसाद खिलाकर बेहोश कर दुष्कर्म के मुकदमे में अदालत ने दोषी को आठ वर्ष की सजा सुनाई है। यह फैसला एडीजे फास्ट ट्रैक प्रथम अनुपम सिंह की अदालत से सुनाया गया है।
एडीजीसी कुलदीप सिंह तोमर के अनुसार, घटना 4 फरवरी 2017 की है। वादी के अनुसार, उसकी पत्नी सुबह मंदिर में पूजा करने गई थी। लौटते समय आरोपी मिला और उसने प्रसाद के नाम पर पत्नी को बर्फी खाने के लिए दी। बर्फी खाते ही महिला बेहोश हो गई।
जब उसे होश आया तो आरोपी उसके साथ दुष्कर्म कर रहा था और वह किसी घर में मौजूद थी। महिला ने शोर मचाया। मगर कोई मदद नहीं मिली। बाद में आरोपी उसे डराते धमकाते हुए एक जगह रास्ते में फेंककर चला गया। मामले में ग्रामीणों की मदद से पति को खबर दी।
फिर थाने से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक से शिकायत की गई। मगर कोई मदद नहीं मिली। बाद में अदालत में याचिका दायर की। तब अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ। न्यायालय ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर आरोपी महावीर सिंह को दोषी करार देते हुए आठ वर्ष कैद व 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
एसबीआई मुख्य प्रबंधक अदालत में तलब
एडीजे-13 नरेंद्रपाल राणा की अदालत द्वारा बार-बार मांगे जाने के बाद भी आख्या न मिलने पर अदालत ने एसबीआई मुख्य शाखा के वरिष्ठ प्रबंधक को तलब किया है। साथ ही कहा है कि वे अदालत में पेश होकर आख्या दें और स्पष्टीकरण दें। एडीजीसी सुधाकर कुलश्रेष्ठ के अनुसार, 90 हजार रुपये के 31 जुलाई 2017 के एक चालान संख्या ए-133621 के संबंध में आख्या 4 अप्रैल को तलब की गई।
इससे संबंधित मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। दो मई को पुन: अदालत स्तर से आख्या तलब की गई। मगर बैंक स्तर से अदालत को आख्या नहीं भेजी गई। इस पर अब अदालत ने सात जून तारीख नियत करते हुए वरिष्ठ प्रबंधक को तलब कर स्पष्टीकरण देने व आख्या सहित अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
फहद हत्याकांड में नहीं आया विवेचक, तारीख नियत
सिविल लाइंस के कारोबारी फहद हत्याकांड में शनिवार को नियत तारीख पर सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले में 16 तारीख नियत की गई है। एडीजे फास्ट ट्रैक प्रथम के एडीजीसी कुलदीप सिंह तोमर के अनुसार इस मुकदमे में मुनीर का साथी पूर्व एएमयू छात्र आशुतोष मिश्रा आरोपी है। इस मामले में विवेचक तलब थे, मगर वे नहीं आए। अब 16 जून तारीख नियत की है।