खैर के राष्ट्रीय विद्यालय इंटर कॉलेज से बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। इस विद्यालय में तैनात रहे सहायक अध्यापक जगन्नाथ प्रसाद की बीएड की डिग्री जांच में फर्जी निकली है। जगन्नाथ 32 साल नौ महीने की नौकरी कर चुका है। सिर्फ छह महीने की सेवा बची है। इस दरम्यान लगभग तीन करोड़ रुपये का वेतन ले चुका है।
शिकायतकर्ता की जांच के आधार पर संयुक्त शिक्षा निदेशक जितेंद्र कुमार मलिक ने सेवा समाप्ति के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद को संस्तुति कर दी है। प्रकरण के अनुसार, राष्ट्रीय विद्यालय इंटर कॉलेज खैर में जगन्नाथ प्रसाद की नियुक्ति एक जनवरी 1989 को हुई थी। तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक ने 14 जून 1989 को सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति देने की सहमति प्रदान की।
जबकि इनका विनियमितीकरण छह अप्रैल 1991 को हुआ। 32 साल बाद अरुण कुमार ने इनके प्रमाण पत्रों के फर्जी होने की शिकायत की थी, जिस पर संयुक्त शिक्षा निदेशक जितेंद्र कुमार मलिक और डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा ने जांच बैठा दी, जांच में बीएड के कागजात फर्जी पाए गए। इस जांच में यह भी तथ्य सामने आया कि जिस गौतम बुद्ध विवि शोध संस्थान का प्रमाणपत्र दर्शाया गया है।
वह विवि अनुदान आयोग के अधिनियमों द्वारा अनुरक्षित विश्वविद्यालय की सूची में शामिल नहीं है। जांच पूरी होने पर डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा ने पांच अगस्त को सेवा समाप्ति की संस्तुति की थी, जिसके आधार पर संयुक्त शिक्षा निदेशक ने माध्यमिक शिक्षा परिषद के निदेशक को पत्र भेजकर सेवा समाप्ति की संस्तुति की है। अब परिषद के आदेश पर ही सेवा समाप्त होगी।
मुकदमा दर्ज कर होगी रिकवरी
- 32 सालों में तीन करोड़ रुपये का वेतन लेने वाले जगन्नाथ प्रसाद की सेवा माध्यमिक शिक्षा परिषद के निदेशक के आदेश पर ही समाप्त होगी। इसके बाद मुकदमा दर्ज कराकर अब तक लिये गए वेतन की रिकवरी की जाएगी।