फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़ : सैकड़ों वर्ष बाद होगा ऐसा अति दुर्लभ सूर्य ग्रहण

विज्ञापन
प्रो. अतीक अहमद सिद्दकी, चेयरमैन भूगोल विभाग, एएमयू। - फोटो : CITY OFFICE
विज्ञापन
आशीष निगम
विज्ञापन

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के भूगोल विज्ञान विभाग के चेयरमैन प्रो. अतीक अहमद सिद्दीकी ने बताया कि 21 जून को हुआ एनुलर सोलर एक्लिप्स सूर्य ग्रहण कई मायनों में एतिहासिक और बेहद वैज्ञानिक घटनाक्रम था। अंतरिक्ष विज्ञान की एक महत्वपूर्ण घटना, जिससे भूगोल विज्ञान, खगोल विज्ञान और भौतिक विज्ञान के साथ ज्योतिष विज्ञान के जानकारों ने अपना अपना अध्ययन आगे बढ़ाया है। अब ये घटना कब होगी..? इसका सटीक अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है। ये सैकड़ों वर्ष में होने वाली एक अहम घटना है। ये घटनाक्रम सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के इक्लीपिट्रियल प्लेन के ओवरलैप होने के कारण एक ही पंक्ति में आने से हुआ। इस दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी 180 डिग्री के कोण पर आ गए थे। जिसमें चंद्रमा ने पृथ्वी से बहुत दूर होने के कारण सूर्य को कुछ देर के लिए ढक लिया था। ये सूर्य ग्रहण छह घंटे लंबा था। इसलिए इस अवधि में अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियों, सूर्य ग्रहण के बाद उन पर हुए असर का अध्ययन होना जरूरी है। इसकी वजह अंतरिक्ष को समझने में काफी मदद मिल सकती है। हम भूगोल की नजर से इसका पूरा अध्ययन कर रहे हैं।
शोध
1- खगोल, ज्योतिषी, भूगोल और भौतिक विज्ञानियों ने कई रिकार्ड जुटाए
2- ये मानव सभ्यता के सबसे बड़े आयामों में से एक, शोध हमेशा होते रहेंगे
हाल के सूर्य ग्रहण
1- वर्ष 1982, 2001, 2020, 2039 और 2058 के दिसंबर महीने में पूर्णकालिक सूर्य ग्रहण हो चुका है। इसके अलावा अक्सर अंशकालिक होते रहते हैं।
2- पूर्णकालिक सूर्य ग्रहण में भी हमेशा रिंग ऑफ फायर नहीं बनता है। रिंग ऑफ फायर का बनना, ग्रहण छह घंटे लंबा होना। ग्रहण सबसे बड़े दिन यानी 21 जून को होने के कारण ये सबसे लंबा सूर्य ग्रहण था। लंबी अवधि की वजह से ये अफ्रीका से लेकर यूएई, पाकिस्तान, भारत, आस्ट्रेलिया और चीन तक लगभग आधी से अधिक दुनिया में दिखाई दिया। ये कुछ बातें रविवार के सूर्य ग्रहण को खासा अहम बनाती हैं।
विज्ञापन

बनी रिंग ऑफ फायर
सूर्य चंद्रमा से 400 गुना बड़ा है, रविवार को चंद्रमा पृथ्वी से पहले की तुलना में कहीं अधिक दूर था, लगभग साढ़े तीन लाख किमी दूर। चंद्रमा के बहुत दूर होने की वजह से ऐसा लगा कि उसने सूर्य को पूरा ढक लिया है, हालांकि ऐसा नहीं था। ग्रहों के कक्षाओं में घूमने के कारण सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी 180 डिग्री के कोण पर कक्षाओं की ओवरलैपिंग के कारण एक ही पंक्ति में आ गए थे। इसीलिए ऐसा नजारा बना कि देखने में लगा कि चंद्रमा ने सूर्य को पूरा ढक लिया और सूर्य एक रिंग ऑफ फायर की तरह चमक उठा। ये नजारा पूरी दुनिया में बहुत देर तक देखने को मिला। 21 जून साल का सबसे बड़ा दिन था, जिसे भूगोल की भाषा में समर सोलिस्टिक कहा जाता है।
छह घंटे लंबा ग्रहण
रविवार को हुआ एनुलर सोलर एक्लिप्स सूर्य पर लगा सबसे लंबा ग्रहण भी है। ये सुबह 9.15 से दोपहर 3.04 बजे तक रहा है, लगभग छह घंटे तक। अफ्रीका से पाकिस्तान, हिंदुस्तान से ये आस्ट्रेलिया और चीन तक दिखा। देश में ये राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, उतराखंड से आगे की ओर दिखाई दिया।
विज्ञापन

ऐसे होता है चंद्र ग्रहण
(न्यू मून) अमावस्या और (फुल मून) पूर्णिमा महीने में दो बार होते हैं। उस वक्त चांद की कक्षा की ज्यामितीय पर अलग अलग बल बढ़ने पृथ्वी पर ज्वार भाटा की स्थिति होती है। ये पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से होता है। उस वक्त चंद्रमा-पृथ्वी-सूर्य एक ज्यामितीय में आते हैं। जिसकी वजह से पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने से चंद्र ग्रहण बनता है। पृथ्वी चंद्रमा के आगे आ जाती है, जिससे सूर्य की पूरी रोशनी चंद्रमा पर नहीं पड़ती है और चंद्रमा पर अंधेरे की वजह से काली छाया दिखती है। यही चंद्र ग्रहण है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें