कुछ विभागों के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे कुछ अधिकारी एवं कर्मियों की गलत आदतों से पूरे विभाग की बदनामी हो रही है। ताजा मामला एटा का है। जहां एक हैसियत प्रमाण पत्र जारी कराने में मंडलायुक्त को हस्तक्षेप करना पड़ा।
एटा के जलेसर कस्बे के महावीर गंज निवासी मुकुल कुशवाहा स्नातक है। उन्होंने हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया। लेकिन उनके आवेदन को आगे नहीं बढ़ने दिया गया। इस पर उन्होंने आईजीआरएस पोर्टल पर 12 फरवरी को शिकायत की कि क्षेत्रीय लेखपाल यदुवीर सिंह द्वारा उनके आवेदन पत्र पर आपत्ति लगाई गई है कि प्राप्त प्रपत्रों में संस्था का नाम गलत दर्शाया गया है, जिस पर उनके द्वारा आपत्ति लगाकर निरस्त करने के संस्तुति की गई है। मुकुल ने मार्च में एक बार फिर आवेदन किया। आनलाइन चेक करने पर ज्ञात हुआ कि लगभग साढ़े तीन माह व्यतीत होने के बाद भी आवेदन पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। तब उन्होंने जिलाधिकारी एटा को 29 जून को शिकायती पत्र भेजा। पत्र की प्रतिलिपि मंडलायुक्त को मिली।
मंडलायुक्त ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए डीएम एटा से जवाब मांगा। डीएम ने बताया कि 19 अगस्त को प्रमाण पत्र बना कर दे दिया गया है। इस घटना के बाद मंडलायुक्त ने सभी डीएम, एसडीएम को निर्देशित किया है कि अधीनस्थों पर अंकुश लगाते हुए भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएं।