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अलीगढ़: सर सैयद ने आत्मीयता व सहिष्णुता को बढ़ावा दिया: मलिक

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अलीगढ़: सर सैयद डे के अवसर पर ऑनलाइन समारोह को संबोधित करते कुलपति और मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल ? - फोटो : CITY OFFICE
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि सर सैयद ने धर्म, जाति या नस्ल के आधार पर बिना किसी भेदभाव के जीवन भर धार्मिक आत्मीयता, सहिष्णुता और आपसी समझ को बढ़ावा दिया। बुद्धिजीवी और विद्वान सर सैयद को आधुनिक भारत के निर्माताओं में गिनते हैं। उन्हें 19 वीं शताब्दी में देश में वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया जाता है। वे शनिवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान की 203 वीं जयंती के अवसर पर आनलाइन आयोजित स्मृति समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मलिक ने कहा कि इस ऐतिहासिक विश्वविद्यालय का शताब्दी वर्ष उत्सवों से भरा हो सकता था यदि दुनिया कोरोना की चपेट में नहीं आती। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के कोरोना योद्धाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए सत्यपाल मलिक ने कहा कि इस कालेज के डॉक्टर निम्न आर्थिक स्तर के रोगियों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एएमयू विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सामाजिक विज्ञान, मानविकी और ज्ञान की अन्य महत्वपूर्ण शाखाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रयासरत है। इस विरासत के संरक्षण, कल्याण तथा विकास के लिए प्रयास करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। एएमयू प्रो चांसलर, नवाब इब्ने सईद खान आफ छतारी ने मुख्य अतिथि को आभासी तौर पर स्मृति चिह्न प्रस्तुत किया।
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सर सैयद की क्रांति ने किया बदलाव: कुलपति
एएमयू के कुलपति, प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि सर सैयद ने समाज में क्रांति उत्पन्न कर दी जिसने भारतीय समाज को सभी क्षेत्रों में बदल कर रख दिया। वह बहुमुखी प्रतिभा के लेखक थे जिन्होंने बड़ी संख्या में किताबें लिखीं। यह बहुत गर्व, खुशी और संतोष की बात है कि हम एएमयू की स्थापना की 100वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। सर सैयद की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासांगिक हैं जितनी वे उनके जीवन काल में थीं। एएमयू के दरवाजे धर्म, जाति या पंथ के आधार पर बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए खुले हैं।
प्रो. विभा शर्मा, प्रोफेसर एम शकील अहमद समदानी, हयात फतिमा और कमरुल इस्लाम ने सर सैयद अहमद खान की शिक्षाओं, दर्शन, कार्यों पर भाषण दिए। इस अवसर पर प्रो चांसलर नवाब इब्ने सईद खान आफ छतारी, सहकुलपति, प्रोफेसर जहीरुद्दीन, ट्रेजरार प्रोफेसर हकीम सैयद जिुल्लुर्रहमान, परीक्षा नियंत्रक मुजीब उल्लाह जुबेरी, वित्त अधिकारी प्रो. एस एम जावेद अख्तर और प्राक्टर प्रोफेसर मोहम्मद वसीम अली सहित अन्य लोग भी आनलाइन समारोह में शामिल हुए। डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. मुजाहिद बेग ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया जबकि डा. फायजा अब्बासी और डा. शारिक अकील ने कार्यक्रम का संचालन किया।
इनको दिए गए पुरस्कार
राज्यपाल सत्यपाल मलिक और प्रोफेसर मंसूर ने प्रतिष्ठित इतिहासकार डा. गेल मिनौ और अंजुमन-ए-इस्लाम को क्रमश: अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सर सैयद उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया। डा. गेल मिनौ को प्रशस्ति पत्र, दो लाख रुपये नकद व अंजुमन-ए-इस्लाम को प्रशस्ति पत्र, एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। एएमयू के अप्लाइड केमिस्ट्री विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. इनामुद्दीन को एएमयू यंग रिसर्चर ऑफ द ईयर अवार्ड से सम्मानित किया गया। इंस्टीट्यूट आफ एडवांस स्टडीज इन एजुकेशन, श्रीनगर के छात्र मुश्ताक उल हक अहमद सिकंदर को सर सैयद अहमद खान की जयंती पर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अखिल भारतीय निबंध लेखन प्रतियोगिता का पहला पुरस्कार दिया गया। एएमयू में एमए की छात्रा बुशरा अजीज और, महाराजा कालेज, एर्नाकुलम, कोच्चि में पीएचडी की छात्रा अंजना मेनन को क्रमश: द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
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सेंटनरी गेट का ऑनलाइन उद्घाटन
अलीगढ़। सर सैयद डे के अवसर पर ही विश्वविद्यालय के चांसलर एवं आध्यात्मिक गुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन ने आनलाइन माध्यम से विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष की यादगार के रूप में कैंपस के उत्तरी भाग में निर्मित वैभवशाली सेन्टेनरी गेट का उद्घाटन किया। इससे पूर्व अधिकारियों और शिक्षकों के साथ कुलपति प्रोफेसर मंसूर ने सर सैयद की मजार पर चादर पोशी के बाद पुष्पांजलि अर्पित की। कुलपति ने सर सैयद हाउस में सर सैय्यद अहमद खान से संबंधित पुस्तकों और तस्वीरों की ऑनलाइन प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।
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