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अलीगढ़: मंदिर की गुमटी क्षतिग्रस्त होने पर जलाली में बवाल, लाठी-डंडे हाथ में लेकर प्रदर्शन करते हुए निकाला जुलूस

Sun, 13 Mar 2022 01:48 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़

सार

जिलाध्यक्ष सहित तमाम भाजपा नेता भी इस प्रदर्शन की खबर पहुंच गए। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की घंटों की मशक्कत और जिलाध्यक्ष द्वारा एसएसपी से की गई वार्ता के बाद बनी 24 घंटे में कार्रवाई की सहमति पर प्रदर्शन रोका गया। इसके बाद दोपहर में बाजार खोला गया।
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भीड़ को समझाते पुलिस अधिकारी। संवाद - फोटो : HARDUAGANJ
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विस्तार
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सांप्रदायिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील जिले के कस्बा जलाली में शुक्रवार रात मंदिर की गुमटी क्षतिग्रस्त होने की घटना ने शनिवार सुबह तूल पकड़ लिया। जमा हुई भीड़ ने जबरदस्त तनाव के बीच जमकर हंगामा किया। लाठी-डंडे हाथ में लेकर प्रदर्शन करते हुए जुलूस निकाला।
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जिलाध्यक्ष सहित तमाम भाजपा नेता भी इस प्रदर्शन की खबर पहुंच गए। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की घंटों की मशक्कत और जिलाध्यक्ष द्वारा एसएसपी से की गई वार्ता के बाद बनी 24 घंटे में कार्रवाई की सहमति पर प्रदर्शन रोका गया। इसके बाद दोपहर में बाजार खोला गया।

फिलहाल, एहतियातन कस्बे में पुलिस-पीएसी तैनात है और गुमटी क्षतिग्रस्त करने के नामजद आरोपी की तलाश जारी है। वहीं, दरोगा व सिपाही को चौकी से हटाकर थाने से संबद्ध कर दिया गया है। कस्बा के आबादी क्षेत्र से करीब चार सौ मीटर दूर स्थित वनखंडेश्वर महादेव मंदिर परिसर में डेढ़ वर्ष पूर्व एक खंभे पर हनुमान मंदिर स्थापित किया गया था, जिसमें गुमटी को सहारा देने वाले दो खंभे महाशिवरात्रि पर जुटी भीड़ में गिर गए थे।
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तब से गुमटी ऊपर से चिपकी हुई थी और नीचे से हवा में लटकी थी। शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे मंदिर पर घूमने पहुंचे कस्बे के लोगों ने गुमटी को जमीन पर गिरा व टूटा हुआ पाया तो आक्रोश पैदा हो गया। इसी बीच सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल किया गया। इसके बाद रात में ही वहां काफी भीड़ जमा हो गई।

कस्बे के ही संप्रदाय विशेष के युवक पर नशे में गुमटी तोड़ने का आरोप लगाते हुए धरना शुरू कर दिया गया था। रात में इंस्पेक्टर के समझाने पर किसी तरह धरना समाप्त हुआ था। इसी बीच पुलिस चौकी पर पूर्व चेयरमैन ने आरोपी की पैरवी की, जिसे लेकर रात में नोकझोंक हुई थी। किसी तरह हंगामा शांत हुआ था।

इधर, शनिवार सुबह यह खबर जंगल में लगी आग की तरह फैली और दिन निकलते ही काफी संख्या में लोग मंदिर पर एकत्रित होने लगे। देखते ही देखते वहां कई गांवों के लोग जमा हो गए। इस दौरान नामजद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए हंगामा-प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। इस खबर पर थाना पुलिस के साथ-साथ सीओ अतरौली भी वहां पहुंच गए। करीब डेढ़ घंटे तक लोगों को समझाने का प्रयास किया गया। मगर बात नहीं बनी और भीड़ हाथ में लाठी-डंडे लिए कस्बे की ओर नारेबाजी करते हुए जुलूस की शक्ल में कूच कर गई। इससे पुलिस के हाथ पैर फूल गए।

इसी बीच वहां एसपी देहात, सीओ तृतीय, एडीएम प्रशासन, एसडीएम सहित कई थानों का फोर्स पहुंच गया। कस्बे में बस स्टैंड तक पहुंचे जुलूस को बल प्रयोग की चेतावनी देकर रोका गया। तब जाकर यह जुलूस वापस नारेबाजी करते हुए मंदिर पर आया। इसी बीच हंगामा-प्रदर्शन की खबर पर भाजपा जिलाध्यक्ष ऋषिपाल सिंह, भाजपा नेता ठाकुर गोपाल सिंह, शल्यराज सिंह, जसवीर सिंह, कुशल पाल सिंह, धीरेंद्र प्रताप सिंह आदि भी पहुंच गए थे। जिलाध्यक्ष ने लोगों से वार्ता की तो भीड़ की ओर से मांग आई कि जलाली चौकी पर तैनात दरोगा व एक सिपाही को तत्काल हटाया जाए।

रात में पूर्व चेयरमैन द्वारा की गई आरोपी की पैरोकारी का घटनाक्रम बताते हुए कहा कि वे इसी तरह चौकी में ज्यादा दखल रखती हैं। उन पर पाबंदी लगाई जाए। कोतवाल पर भी गंभीर आरोप लगाए गए। साथ में आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की बात रखी गई। इस पर जिलाध्यक्ष ने एसएसपी से फोन पर वार्ता की। एसएसपी की ओर से रविवार तक सभी बातों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया। इस तरह करीब 3 घंटे बाद प्रदर्शन व हंगामा शांत हुआ।

जिलाध्यक्ष ने लोगों से कहा कि वे खुद जनता के साथ हैं। रविवार तक अगर बात नहीं बनी तो फिर आगे हम कोई भी कदम उठाएंगे। इसके बाद भीड़ वहां से धीरे धीरे घरों को गई। इसके बाद 12 बजे जाकर कस्बे के बाजार भी खुल सके। मगर एहतियातन कस्बे में पुलिस व पीएसी तैनात की गई है। इधर, मामले में कपिल ठाकुर की तहरीर पर अफजाल कुरैशी व उसके अज्ञात साथी पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

तहसीलदार को भाजपा नेता ने धकियाया
बस अड्डे से वापस लौटते समय भीड़ रजवाहा पुल के पास सड़क पर धरना देकर बैठ गई। इस दौरान तहसीलदार कोल जयप्रकाश की किसी बात पर भाजपा नेता ठा.शल्यराज सिंह भड़क गए। जिसके बाद तहसीलदार कोल को काफी पीछे की ओर धकियाते हुए ले गए। भीड़ के उग्र तेवर को देखते हुए सीओ अतरौली शिव प्रताप सिंह ने उन्हें बचाया। अन्यथा एक बार तो ऐसा लगा कि कहीं हाथापाई न हो जाए।

गिरफ्तारी को लगी टीमें, दबिश जारी
नामजद की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों ने एड़ी चोटी का जोर लगाया है। फिलहाल पुलिस की कई टीमें नामजद की गिरफ्तारी को लेकर जगह जगह दबिश दे रही हैं। निकटवर्ती गांव में भी नामजद के परिचितों के यहां दबिश दी गई हैं। वहीं सर्विलांस टीम ने मंदिर परिसर से सर्विलांस साक्ष्य संकलित किए हैं। जिनकी मदद से वहां मौजूद लोगों की जानकारी की जा रही है।

मंदिर पर मिला खाली क्वार्टर-गिलास
मंदिर पुजारी के अनुसार शाम छह बजे पूजा करने के दौरान वे मंदिर आए तो गुमटी क्षतिग्रस्त मिली थी। सही कराने की मंशा रखते हुए वे वहां से चले गये। वहीं मौके पर मिले शराब के पौब्बे व गिलास मिले थे। जिन्हें उन्होंने नामजद का ही माना। साथ में कहा कि पुलिस को जानकारी दी जाएगी।

छावनी बना कस्बा
शनिवार सुबह भीड़ के उग्र प्रदर्शन के बाद दोपहर तक जलाली छावनी बना दिखाई दिया। भीड़ के उग्र रूप को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कस्बे में चप्पे चप्पे पर पुलिस और पीएसी जवानों की तैनाती कर दी। बाजार में पुलिस बल के साथ फ्लैग मार्च किया गया। दुकानदारों से भयमुक्त होकर दुकान खोलने की अपील की। मंदिर पर भी एक सब इंस्पेक्टर को तैनात किया गया है।

बाजार खुलता तो हो सकता था भारी नुकसान...
मंदिर को लेकर रात से ही कस्बे के लोग सर्तक थे। सुबह बाजार बंद करने के आह्वान पर लोगों ने पूरी तरह दुकानें बंद कर ली थीं। जानकारों का कहना है कि यदि बाजार खुला होता तो कोई भी बड़ी घटना हो सकती थी। इसमें नुकसान की संभावना ज्यादा रहती।

- मंदिर की गुमटी टूटी है, पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर ली गई है। नामजद की गिरफ्तारी को रात भी दबिश दी गई थी। अब भी टीमें लगी हुई हैं। घटना स्थल की निरीक्षण कर लिया गया है तकनीशियन टीम भी मौजूद है, जल्द ही गिरफ्तारी हो जायेगी। - शुभम पटेल, एसपी देहात

जलाली को फिर लगी नजर, इब्नेबतूता ने किया मिसाल का जिक्र
इतिहासकारों के अनुसार कस्बा जलाली के सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल अरबी लेखक इब्ने बतूता ने अपनी किताब में किया है। उन्होंने अपने भारत भ्रमण पर लिखी यात्रा व्रतांत संबंधी किताब में कहा है कि वे भारत में घूमे। मगर कस्बा जलाली जैसा सांप्रदायिक सौहार्द कहीं नहीं दिखाई दिया।

मगर ये बात बेहद पुरानी है। अब समय-समय पर लोग कस्बा जलाली की शांति को पलीता लगाने का प्रयास करते रहते हैं। 2013 में भी इसी तरह एक घटना हुई थी। इसके अलावा यहां पिछले 70 सालों से रावण दहन को लेकर जमीन पर हर वर्ष विवाद होता था। उसे 2019 में तत्कालीन सीओ अतरौली पंकज श्रीवास्तव ने प्रयास कर निपटवाया। तय हुआ कि अब कभी विवाद नहीं होगा। इसी तरह 2017 में भाजपा सरकार बनने पर विवाद खड़ा हुआ था। तब किसी तरह निपटा। अब फिर यह नया विवाद सामने आया है। हालांकि इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं खड़ी हो रही हैं।

मंदिर की गुमटी टूटने पर प्रदर्शन करते लोग। संवाद- फोटो : HARDUAGANJ

 

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