स्वच्छ भारत मिशन में चंद सालों पहले बने सामुदायिक शौचालय गुणवत्ता के मामले में फेल साबित हो रहे हैं। वर्तमान में थर्ड पार्टी जांच में अब तक इगलास, गोंडा एवं टप्पल में 80 सामुदायिक शौचालयों की गुणवत्ता खराब मिली है। अधिकांश की हालत जर्जर है तो पानी, बिजली यहां तक कि सोख्ता गड्ढे तक नहीं मिले। अब जिला पंचायती राज विभाग संबंधित ठेकेदार एवं अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में जुटा है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत पिछले कुछ सालों में खुले में शौच से मुक्ति के लिए गरीब, मजलूम व बेसहारा लोगों के लिए सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया गया था। जिले की कुल 867 ग्राम पंचायतों में एक एक सामुदायिक शौचालय बनाया गया। इनमें से अधिकांश दो से तीन वर्ष पहले ही बने हैं। इनके निर्माण की घटिया गुणवत्ता की पोल खुलनी शुरू हो गई है।
शासन द्वारा नामित आरसीयूईएस एजेंसी द्वारा इगलास, गोंडा एवं टप्पल में हाल ही में 80 सामुदायिक शौचालयों की जांच की है। इनमें से अधिकांश की गुणवत्ता खराब मिली है। संस्था के सर्वेयरों का कहना है कि ज्यादातर शौचालयों में शीट टूटी मिलीं। पानी व लाइट की व्यवस्था नहीं पाई गई। कुछ में तो सोख्ता गड्ढे व सेप्टिक टैंक तक नदारद मिले। गंदगी की समस्या भी मिली।
निर्माण के बाद जांच में पास, दो साल में ही फेल
ग्राम पंचायतों में बने 75 से 80 फीसदी सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पिछले दो से तीन सालों में हुआ है। निर्माण के तत्काल बाद जिला पंचायत राज विभाग ने इन सभी के निर्माण की गुणवत्ता की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई थी। उस समय गुणवत्ता के मामले में सभी को पास कर दिया गया। दो सालों बाद हो रही जांच में यह शौचालय गुणवत्ता के मामले में फेल साबित हो रहे हैं।
स्वयं सहायता समूहों के पास है मरम्मत का जिम्मा
ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालयों की मरम्मत का जिम्मा पंचायतों में सक्रिय महिला स्वयं सहायता समूहों का है। इसके लिए उन्हें हर माह छह हजार रुपया मानदेय तथा तीन हजार रुपया मरम्मत मद में दिया जाता है। इसके बावजूद सर्वे में शौचालयों में गंदगी व अव्यवस्था देखकर समूहों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।
- सामुदायिक शौचालयों के निर्माण की गुणवत्ता की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जा रही है। अभी कुछ ही ब्लॉकों के शौचालयों मे जांच हुई है। जांच में गुणवत्ता खराब मिली है। जांच पूरी होने के बाद खराब गुणवत्ता वाले शौचालयों के मामले में संबंधित ठेकेदार एवं अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - धनंजय जायसवाल, जिला पंचायत राज अधिकारी