अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्रों के बीच भड़काऊ भाषण देने के आरोपों में फंसे गोरखपुर के डॉ. कफील को बेशक हाईकोर्ट से राहत मिलने की बात कही जा रही है। मगर जिला पुलिस को मई में ही डॉ. कफील के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति मिल चुकी है। इस बात की पुष्टि खुद सीओ तृतीय ने की है। हालांकि अभी कफील के न्यायालय में हाजिर न होने के कारण मुकदमे में न चार्ज फ्रेम हुआ है और न ही मुकदमे का ट्रायल शुरू हुआ है।
घटनाक्रम पर गौर करें तो 12 दिसंबर 2019 को डॉ. कफील एएमयू में छात्रों के बीच आए थे और सीएए-एनआरसी के विरोध में भाषण देकर गए थे। इसके बाद उन पर सिविल लाइंस में कथित तौर भड़काऊ भाषण देने का मुकदमा दर्ज किया गया और आरोप लगाया गया कि इसी भाषण की वजह से एएमयू के छात्र उत्तेजित हुए और 14 दिसंबर की रात उपद्रव हुआ।
इस मामले में 29 जनवरी को यूपी एसटीएफ ने कफील को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। बाद में जिला प्रशासन ने कफील पर इसी मामले में रासुका तक लगाया। जिसमें कफील के बयान को आधार बताते हुए उपद्रव की वजह करार दिया। मगर हाईकोर्ट ने बाद में रासुका की कार्रवाई को रद्द कर दिया। इसके बाद कफील रिहा हुए।
कफील ने रिहा होने के बाद खुद पर सिविल लाइंस में दर्ज एफआईआर, उसमें दायर की गई चार्जशीट के खिलाफ हाईकोर्ट में अर्जी दायर की, जिसमें अनुरोध किया कि बिना अभियोजन स्वीकृति के यह मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। उनकी अर्जी हाईकोर्ट ने स्वीकार ली है। इधर, जिला पुलिस का कहना है कि उन्हें कफील के मामले में मई माह में ही अभियोजन की स्वीकृति मिल चुकी है।
- प्रकरण वर्ष 2019 का है। वर्तमान में डॉ. कफील से जुड़े उपरोक्त केस में अभियोजन की स्वीकृति प्राप्त की जा चुकी है और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। - श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय
ये हमारी बड़ी जीत : इरफान गाजी
हाईकोर्ट के आदेश पर खुशी जाहिर करते हुए डॉ.कफील के स्थानीय अधिवक्ता इरफान गाजी ने कहा है कि ये हमारी बड़ी जीत है। अब इस मामले में न्यायालय में हाईकोर्ट का आदेश दाखिल कर आगे अन्य प्रक्रिया पूरी की जाएंगी।