अलीगढ़। कहते हैं कानून के हाथ बेहद लंबे होते हैं। अपराध करने के बाद अपराधी कहीं भी छिपा हो और सुराग किसी भी हद तक मिटा दिए गए हों, मगर पुलिस उन्हें खोज ही लाती है। मगर यहां एक ऐसा उदाहरण देखने को मिला है कि पुलिस ने पिछले तीन-चार सालों में जिले में विभिन्न तरह की मौतों के 36 मुकदमों में वर्ष 2019 में एफआर यानी अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल की है। इसके पीछे वजह यही है कि चाहे मुकदमा अज्ञात में दर्ज हो या नामजद। उनके संबंध में कोई सुराग या साक्ष्य न मिलने के कारण यह फैसला लिया गया है। ऐसे में यह सवाल अधूरे रह गए कि इन 36 लोगों की हत्या कैसे हुई और इनको किसने, क्यों और किन परिस्थितियों में मारा।
समय-समय पर मुकदमों की विवेचना निस्तारण को लेकर अभियान चलता रहता है। हाल ही में भी एक अभियान चला था, जिसमें काफी संख्या में विवेचना निस्तारित की गई थीं। इसी तरह वर्ष 2019 में पुलिस ने हत्या, दहेज हत्या, अज्ञात की हत्या जैसे उन मुकदमों का निस्तारण किया, जिनको लेकर कोई सुराग नहीं मिले और नामजदों पर कोई साक्ष्य नहीं मिले। ऐसे 36 मुकदमों में वर्ष 2019 में न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई है। इनमें कुछ मुकदमे ऐसे भी हैं, जिनके प्रति पीड़ित पक्ष ने आपत्ति याचिका अदालत में दायर की है और वे लंबित हैं। हालांकि नियम ये है कि बेशक पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दायर कर दी। अगर भविष्य में कभी कोई सुराग या साक्ष्य इसके संबंध में मिलेगा तो फिर से विवेचना शुरू कर दी जाएगी।
- हत्या संगीन अपराध के मुकदमे लंबे समय तक लंबित रहने पर बेशक विवेचकों के स्तर से अंतिम रिपोर्ट लगाकर न्यायालय में दाखिल कर दी जाती हैं। मगर उनमें साक्ष्य संकलन पर काम चलता रहता है। अब मुकदमे अगर अज्ञात में हैं तो भी और नामजद हैं तो भी। अगर उनमें कोई नया साक्ष्य कभी भी सामने आता है तो उसकी सच्चाई जानने के बाद नए सिरे से विवेचना शुरू की जाती है और फिर न्यायालय में नए साक्ष्य पेश कर कार्रवाई की जाती है। ऐसा नहीं कि मुकदमा अंतिम रिपोर्ट होने के बाद बंद हो गया। इनमें नियमानुसार विवेचना प्रचलित होने का उल्लेख कर ही अंतिम रिपोर्ट दी जाती है। - मुनिराज जी, एसएसपी
-- हत्या के इन अज्ञात मुकदमों में नहीं मिले सुराग--
1-2017-302 (हत्या) बनाम अज्ञात इगलास
2-2018-302, 201 (हत्या व साक्ष्य मिटाना) बनाम अज्ञात सासनी गेट
3-2018-302 (हत्या) बनाम अज्ञात पिसावा
4-2016-396 (हत्या युक्त डकैती) बनाम अज्ञात इगलास
5-2018-302 (हत्या) बनाम अज्ञात सिविल लाइंस
6-2018-302 (हत्या) बनाम अज्ञात गोंडा
7-2019-302, 201 (हत्या व साक्ष्य मिटाना) बनाम अज्ञात गंगीरी
--विवाहिता की मौत के मामलों में साक्ष्य न तलाश पाई पुलिस--
1-2018-दहेज हत्या बनाम नामजद इगलास
2-2018-दहेज हत्या बनाम नामजद चंडौस
3-2018-दहेज हत्या बनाम नामजद जवां
4-2018-दहेज हत्या बनाम नामजद जवां
5-2018-विवाहिता हत्या बनाम नामजद गंगीरी
6-2018-दहेज हत्या बनाम नामजद खैर
7-2018-दहेज हत्या बनाम नामजद अतरौली
8-2019-दहेज हत्या बनाम नामजद क्वार्सी
9-2019-विवाहिता हत्या बनाम नामजद पालीमुकीमपुर
10-2019-दहेज हत्या बनाम नामजद हरदुआगंज
11-2019-दहेज हत्या बनाम नामजद अतरौली
12-2019-दहेज हत्या बनाम नामजद चंडौस
13-2019-दहेज हत्या बनाम नामजद गोंडा
--इन नामजद मुकदमों में आरोपियों के प्रति साक्ष्य नहीं मिले--
1-2018-302, 201 बनाम नामजद हरदुआगंज
2-2018-302 (हत्या) बनाम नामजद बन्नादेवी
3-2018-302,201 (हत्या) बनाम नामजद गभाना
4-2018-302, 364, 201 (अपहरण हत्या)बनाम नामजद टप्पल
5-2016-302,201 (हत्या) बनाम नामजद गभाना
6-2019-गैरइरादतन हत्या बनाम नामजद सिविल लाइंस
7-2018-302, 328 (जहरखुरानी हत्या)बनाम नामजद छर्रा
8-2019-302, 328 (जहरखुरानी हत्या)बनाम नामजद क्वार्सी
9-2018-302, 120बी (हत्या व साजिश)बनाम नामजद गभाना
10-2019-302, 506 (हत्या)बनाम नामजद गांधीपार्क
11-2019-302 (हत्या)बनाम नामजद अकराबाद
12-2018-302, 201 (हत्या साक्ष्य मिटाना)बनाम नामजद विजयगढ़
13-2017-आत्महत्या के लिए उकसाना बनाम नामजद क्वार्सी
14-2019-302, 201 (हत्या साक्ष्य मिटाना)बनाम नामजद इगलास
15-2019-363, 302 (अपहरण हत्या) बनाम नामजद गोंडा
16-2019-302 (हत्या)बनाम नामजद देहली गेट