जहरीली शराब कांड की मजिस्ट्रेटी जांच पर इंस्पेक्टर खैर ने सवाल उठाए हैं। कमिश्नर को प्रार्थना पत्र देकर उन्होंने प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही उनकी भूमिका तय करने की मांग की है। बता दें कि पिछले साल जहरीली शराब पीने से जिले में 126 लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि, जिला प्रशासन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर सिर्फ 106 लोगों की ही मौत होना स्वीकार किया था।
इस प्रकरण में तत्कालीन डीएम चंद्रभूषण सिंह ने एडीएम प्रशासन डीपी पाल को मजिस्ट्रेटी जांच का जिम्मा सौंपा था। जांच 15 दिन में पूरी होनी थी, जो करीब 10 माह में पूरी हो सकी। पिछले दिनों एडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी, जिसके बाद जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी।
जांच अधिकारी ने तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी समेत 26 अधिकारियों और कर्मचारियों को दोषी ठहराया है। खैर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक प्रवेश कुमार ने कमिश्नर गौरव दयाल को दिए पत्र में उनकी भूमिका की सही जांच कराने का अनुरोध किया है।
पत्र में लिखा है कि उनके थाना क्षेत्र में जहरीली शराब की बिक्री नहीं हुई थी। थाना क्षेत्र के जिन लोगों की मौत शराब के सेवन से हुई थी, वो पिसावा, क्वार्सी, महुआखेड़ा, गांधीपार्क, हरदुआगंज, मडराक क्षेत्र में हुई थी। इस प्रकरण में मुकदमे भी दर्ज हुए, लेकिन जांच में इन थानों से जुड़े थानेदारों के नाम शामिल नहीं किए, जांच अधिकारी ने उनका नाम शामिल किया है, जबकि खैर थाना क्षेत्र में कहीं भी जहरीली शराब नहीं बिकती है।
थाना क्षेत्र के जिस गांव के लोग शराब पीने से मरे हैं, वह लोधा थाना क्षेत्र ककोला ठेका से जुड़ा मामला है। इस प्रकरण में शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रशासन का पूरा सहयोग किया था, जिन लोगों की शराब पीने से तबियत बिगड़ी उनको अस्पताल तक पहुंचाया। ऐसे में बिना किसी दोष के सजा देना न्याय उचित नहीं हैं, जबकि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया था।