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अलीगढ़ : युवती को जिंदा जलाकर मारने वाले को सश्रम उम्रकैद की सजा

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कासिमपुर पावर हाउस की आवासीय कॉलोनी में पावर हाउसकर्मी की 24 वर्षीय बेटी को केरोसिन डालकर जिंदा जलाकर मारने के आरोपी को सश्रम उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। बहुचर्चित कांड में यह फैसला एडीजे प्रथम शाहिद रजा की अदालत ने सुनाया है और आरोपी को 70 हजार रुपये जुर्माने से भी दंडित किया है।
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साथ ही जुर्माने की पचास फीसदी राशि पीड़ित पक्ष को देने के निर्देश दिए हैं। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी अमर सिंह तोमर के अनुसार, घटना 6 अगस्त 2015 की सुबह करीब साढ़े नौ बजे की है। पावर हाउस में नलकूप ऑपरेटर के पद पर तैनात मूल रूप से नगौला निवासी वीरेंद्र गिरी पावर हाउस की टाइप-2 कॉलोनी के क्वार्टर नंबर 133/27 में परिवार सहित रहते हैं।
घटना वाले दिन वे सुबह अपनी पत्नी को जेएन मेडिकल कॉलेज डॉक्टर को दिखाने लेकर आए थे। इसी बीच उनके गांव का नितिन गिरी उनके घर पहुंचा और घर में अकेली मौजूद उनकी 24 वर्षीय बेटी खुशबू गिरी से बदतमीजी की। विरोध पर घर में ही मौजूद केरोसिन की केन खुशबू के ऊपर उड़ेलकर उसे आग लगाकर भाग गया।
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खुशबू के शोर पर आसपास के लोग एकत्रित हुए और आनन-फानन उसे वैन में डालकर पहले छेरत के नर्सिंग होम लाया गया। फिर वहां से जेएन मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। रास्ते में स्कूटी से वापस लौटते वीरेंद्र गिरी दंपती भी मिल गए। वे भी वापस मेडिकल पहुंचे। युवती के बयान के आधार पर थाने में तहरीर दी गई। पुलिस ने बयान व मजिस्ट्रेट ने मृत्यु पूर्व बयान दर्ज किए। इलाज के दौरान 11 अगस्त को खुशबू को मेडिकल कॉलेज में मृत घोषित कर दिया गया।
पुलिस ने मुकदमे में हत्या की धारा शामिल करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर चार्जशीट दायर कर दी। न्यायालय में हुई गवाही, युवती के मृत्यु पूर्व बयान, पुलिस के साक्ष्य आदि के आधार पर आरोपी नितिन गिरी को दोषी करार दिया गया है और उम्रकैद व 70 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है। साथ में जुर्माना राशि में से आधी राशि पीड़ित परिवार को देने के आदेश दिए हैं।
- इस बहुचर्चित हत्याकांड पुलिस द्वारा पेश किए गए गवाहों, साक्ष्यों को मजबूती से अदालत के समक्ष रखा गया। युवती के मृत्यु पूर्व बयान करने वाले दरोगा को भी तलब किया गया। मजिस्ट्रेट के समक्ष हुए बयान भी पटल पर रखे गए। हालांकि, अस्पताल लाने वाले तीन में से दो गवाह कमजोर साबित हुए। वे बचाव पक्ष की तरफ से पेश हुए। मगर अभियोजन की मजबूत जिरह व साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सजा सुनाई है। - अमर सिंह तोमर, एडीजीसी
- मैं अपनी पत्नी को दिखाकर मेडिकल कॉलेज से लौट रहा था। तभी सीडीएफ चौकी पर मुझे वैन में मेरे पड़ोसी अशोक, नरेंद्र व शीला बेटी को मेडिकल लेकर आते मिले। रोककर मुझे बताया तो मैं उनके साथ वापस हो लिया। अस्पताल में बेटी ने बताया कि नितिन ने घर में घुसकर उसे जलाया है। यही बात बेटी ने पुलिस व मजिस्ट्रेट को दिए बयान में कही थी।
- वीरेंद्र गिरी, वादी की तहरीर
उस समय मचा था शादी के दबाव का शोर
वीरेंद्र गिरी के तीन बेटियों में दो की शादी हो चुकी है, जबकि एक बेटा पढ़ाई कर रहा था। तीसरी बेटी खुशबू एमए-बीएड कर चुकी थी। उस समय घटना के दौरान पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि नितिन वीरेंद्र के गांव का ही है और पारिवारिक नाते से नितिन रिश्ते में खुशबू का भतीजा लगता है। वह खुशबू से शादी करना चाहता था।
इसके लिए वह दबाव बनाता था। इसी गुस्से में नितिन ने इस घटना को अंजाम दिया था। हालांकि ये तथ्य पुलिस को दी तहरीर में या युवती द्वारा दिए गए मृत्यु पूर्व बयान में कहीं उल्लेखित नहीं किया गया था। तहरीर व बयान में सिर्फ यह उल्लेखित है कि आरोपी अकेले देखकर घर में घुसा, बदतमीजी की और विरोध पर मारपीट करते हुए वहीं रखी केरोसिन की केन से केरोसिन उड़ेलकर उसे आग लगा दी।
बुरी तरह जली थी खुशबू
इस घटना पर जब जवां पुलिस की सूचना पर मजिस्ट्रेट के रूप में एसीएम बयान दर्ज करने गए तो वे खुद उसकी हालत देखकर दंग रह गए थे। उन्होंने यह बात स्वीकारी थी कि पहले भी बहुत ऐसे लोगों के बयान लिए हैं। मगर खुशबू की हालत इस कदर दयनीय है कि उसे देखकर खुद उनकी तबियत गड़बड़ा गई।
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