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शराब कांडः मौत देने वाला मिथाइल एल्कोहल कहां है, कितना है... अधिकारी अंजान

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जहरीली शराब को बनाने में जिस मिथाइल अल्कोहल का इस्तेमाल हुआ था, उसका लाइसेंस किस विभाग से जारी हो रहा है। अधिकारी अब इसका पता लगा रहे हैं, जिससे भविष्य में इस तरह का कोई कांड न होने पाए। अधिकारी इस जानलेवा रसायन को कड़ी निगरानी में लाने की ठोस योजना बना रहे हैं। फिलहाल, आबकारी विभाग से लेकर ड्रग विभाग तक सब इससे अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। जिले में कितना मिथाइल अल्कोहल आता है, कितने का इस्तेमाल औद्योगिक गतिविधियों में होता और कितना शराब बनाने के लिए खप रहा था, प्रशासन इसकी तह तक पहुंच रहा है।
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अपर मुख्य सचिव आबकारी संजय भूसरेड्डी ने निर्देश दिए हैं कि मिथाइल अल्कोहल की सप्लाई वाले टैंकरों पर स्पष्ट रूप से विषाक्त रसायन लिखा होना चाहिए। साथ ही अवैध शराब व मिथाइल अल्कोहल के गलत उपयोग की जानकारी शासन के टोल फ्री नंबर 18001805331 व व्हाट्सएप नंबर 9454466019 पर दी जा सकती है।
बता दें कि जिस शराब को पीने से लोगों की मौत हुई है, वह मिथाइल अल्कोहल से बनी थी। करसुआ के ठेकों, पनैठी में पकड़े गए अवैध शराब के गोदाम में मिली शराब में भी यही जानलेवा रसायन था। तालानगरी में पकड़ी गई इंक एंड साल्वेंट फैक्टरी के सैंपलों की जांच के बाद इस बात की पुष्टि हुई है। इस फैक्ट्री में 12600 लीटर मिथाइल अल्कोहल मिला था।
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मिथाइल अल्कोहल जैसे बेहद खतरनाक रसायन का सरकारी रिकॉर्ड किस विभाग के पास होता है। इसके कारोबार पर किसकी निगरानी है। इसको लेकर वर्तमान में आबकारी विभाग के पास कोई लेखाजोखा नहीं है। आबकारी विभाग से इसका कोई लाइसेंस जारी नहीं हुआ। इसलिए इस जहरीले रसायन का आबकारी अधिकारियों के पास कोई रिकार्ड नहीं मिला है।
विभाग के मुताबिक एथाइल अल्कोहल से शराब बनती है। इस केमिकल पर 70 से 80 प्रतिशत की ड्यूटी प्रदेश सरकार वसूलती है। मगर, मिथाइल अल्कोहल पर कोई ड्यूटी नहीं है। इसका इस्तेमाल उद्योग में होता है। औद्योगिक इस्तेमाल की आड़ में आने वाले मिथाइल का उपयोग नकली शराब बनाने में किया जाता है। विभाग से अलीगढ़ में एथाइल अल्कोहल के दो लाइसेंस हैं, जिनमें से एक डिस्टलरी है, जिसका कोटा करीब 2.50 लाख लीटर प्रतिवर्ष है। दूसरा लाइसेंस विजय नाम की केमिकल फैक्टरी के पास है, उसका कोटा 90 हजार के करीब है।
मिथायल अल्कोहल की लाइसेंसिंग आथारिटी का पता किया जा रहा है। शासन स्तर से आबकारी विभाग से इसकी जानकारी ली जा रही है। औषधि विभाग, आबकारी विभाग के अधिकारियों से इस बाबत नियम कानून की जानकारी की जा रही है। एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी। जिससे कभी भी इस जानलेवा रसायन की निगरानी का तंत्र कमजोर न पड़े।
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चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी।
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