छात्रा की खुदकुशी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जो नहीं होना चाहिए वह हो रहा। कुछ न्यस्त स्वार्थी लोग इस मुद्दे पर सियासत कर रहे हैं, तो कुछ मरने वाली छात्रा के चरित्र हनन के कुत्सित प्रयास में जुट गए हैं। कथित तौर पर एक वीडियो भी सामने लाया जा रहा है। एक बार मान भी लें कि कम उम्र की छात्रा भटक गई थी। सवाल उठता है कि अगर हमारी बहन-बेटी भटक गई तो क्या उससे जीवन का अधिकार छीन लेना चाहिए। क्या मौत और खुदकुशी ही एकमात्र रास्ता है। क्या उसे समझा-बुझाकर सही रास्ते पर लाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। जाहिर सी बात है कि छात्रा के मामले में ऐसा नहीं हुआ। कच्ची उम्र में भटकाव बहुधा हो जाता है। यह बहुत बड़ी और मनोवैज्ञानिक समस्या है। अच्छी बात यह है कि स्कूल प्रबंधन ने यह बात समझी है और अब सही दिशा अख्तियार की है। हम समय को लेकर जरूर यह बात कह सकते हैं कि काश यह कदम पहले उठा लिया जाता तो शायद बच्ची को मौत को गले नहीं लगाना पड़ता।
डांटने-मारने के बजाय बच्चों के हमदर्द बनें...समस्या सामने आने पर कहें...मैं हूं ना
मौजूदा समय में परिजनों की व्यस्तता और बच्चों से संवादहीनता बड़ी समस्या को जन्म दे रही है। जब आप बच्चों पर ध्यान नहीं देते। उनके लिए समय नहीं निकालते। संवाद नहीं करते तो किशोरवय में उनका भटकाव हो सकता है। स्कूल के साथ ही परिजनों का भी दायित्व है कि अपने बच्चों से संवाद बनाए रखें। उनके दोस्त बनकर उनकी समस्याओं पर बात करें। यदि कोई परेशानी है तो आप उसे डांटने-फटकारने और दंडित करने के बजाय इस बात का अहसास दिलाइए-मैं हूं ना।
अलीगढ़ महानगर के रामघाट रोड के ओएलएफ (अवर लेडी फातिमा) स्कूल की छात्रा द्वारा आत्महत्या के बाद मुद्दा लगातार तूल पकड़ रहा है। अब बुधवार को छात्र नेताओं ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए एडीएम सिटी को ज्ञापन दिया है। नौ बिंदुओं पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराते हुए जांच की मांग की है। जांच पूरी होने तक प्रधानाचार्य को स्कूल से अलग रखने का अनुरोध किया है। साथ ही रामघाट रोड पर दिन में जाम के लिए जिम्मेदार स्कूल की पार्किंग भी स्कूल के अंदर कराने का अनुरोध किया है।
एबीवीपी के पूर्व प्रदेश मंत्री बल्देव चौधरी सीटू, जय यादव, तनिष्क प्रताप सिंह, सुमित प्रताप, इमरान खान, हेमराज, अमरेंद्र प्रताप, तोकीर आदि ने बुधवार दोपहर में एडीएम सिटी को ज्ञापन दिया। जिसमें विषय रखा कि छात्रा की आत्महत्या क्यों हुई, इसकी संपूर्ण जांच की जाए। छात्रों द्वारा प्रदर्शन कर लगाए गए आरोपों की जांच की जाए। जिला पुलिस प्रशासन द्वारा कमेटी बनाकर छात्रों के बयान लिए जाएं, ताकि सच सामने आ सके। स्कूल के गेट पर शिकायत पेटिका लगवाई जाए। स्कूल में तत्काल काउंसलर की तैनाती कराई जाए। समय-समय पर पुलिस प्रशासन के अधिकारी ओएलएफ सहित सभी स्कूलों में जाकर बच्चों से संवाद करें।
स्कूल की छुट्टी के समय लगने वाले जाम के लिए जिम्मेदार स्कूलों के अंदर शत प्रतिशत पार्किंग की व्यवस्था कराई जाए। पूरे प्रकरण की जांच होने तक प्रधानाचार्य को अलग रखा जाए। एडीएम सिटी स्तर से छात्र नेताओं को सुना गया और उन्हें आश्वस्त किया गया। इस दौरान यह भी कहा गया कि स्कूल में कोई छात्रा अगर अपने साथी छात्र से बात कर रही है तो उसकी इतनी बड़ी सजा और इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए। पहले उनकी नीयत समझें। अगर, कुछ गलत लगे तो उन्हें समझाएं। तभी कोई कदम उठाएं। अन्यथा यह क्रम आगे भी जारी रह सकता है। अंत में दोषी पर कार्रवाई कर मिसाल पेश करने का अनुरोध किया गया।