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ओएलएफ छात्रा खुदकुशी प्रकरण: जांच कर रहीं पूर्व प्रधानाचार्य, 350 बच्चों ने दिए सुझाव, जांच रहेगी जारी

Thu, 09 May 2024 03:36 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

छात्रों के प्रदर्शन के बाद प्रबंधन के निर्देश पर पूर्व प्रधानाचार्य सिस्टर ज्योत्सना 8 मई को यहां पहुंचीं। उन्होंने मौजूदा प्रधानाचार्य सिस्टर जेरीन संग कक्षा नौ व 10 के सभी विद्यार्थियों से संवाद किया। उनसे कहा कि वे खुलकर अपनी समस्याएं बताएं। चाहे वह समस्या किसी भी स्तर की हो और किसी से जुड़ी हो।
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ऑवर लेडी फातिमा स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया था छात्र-छात्राओं ने - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ में अवर लेडी फातिमा स्कूल (ओएलएफ) की छात्रा की खुदकुशी के बाद गुस्साए विद्यार्थियों के प्रदर्शन से स्कूल प्रबंधन अब हरकत में आया है। प्रकरण की जांच के लिए अलीगढ़ की पूर्व प्रधानाचार्य वर्तमान में उदयपुर में तैनात सिस्टर ज्योत्सना को यहां भेजा गया है।  
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8 मई को उन्होंने स्थानीय प्रधानाचार्य के साथ नवीं व दसवीं के बच्चों से संवाद किया। शिक्षकों संग मैराथन बैठक की। यह भी बताया गया है कि करीब 350 छात्र-छात्राओं ने अपनी नाम पहचान छिपाकर लिखित रूप से समस्या व सुझाव बताए हैं। इसे लेकर एक जांच समिति का गठन कर प्रत्येक कक्षा में काउंसलर की तैनाती तय की गई है। बाकी जांच व संवाद बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगा।

मामले में छात्रों के प्रदर्शन के बाद प्रबंधन के निर्देश पर पूर्व प्रधानाचार्य सिस्टर ज्योत्सना 8 मई को यहां पहुंचीं। उन्होंने मौजूदा प्रधानाचार्य सिस्टर जेरीन संग कक्षा नौ व 10 के सभी विद्यार्थियों से संवाद किया। उनसे कहा कि वे खुलकर अपनी समस्याएं बताएं। चाहे वह समस्या किसी भी स्तर की हो और किसी से जुड़ी हो। मगर उस समय कोई बच्चा बोलने को तैयार न हुआ। इस पर उन्होंने खुद विकल्प रखा कि बच्चे चाहें तो अपनी पहचान छिपाकर लिखित में शिकायत दे सकते हैं। इसके बाद करीब 350 बच्चों ने अपनी समस्या व सुझाव लिखकर दिए। इसे देख प्रबंधन व जांच अधिकारी दंग रह गए। इन पर मंथन के बाद तय किया गया कि हर कक्षा में एक काउंसलर नियुक्त होगा। ताकि भावनात्मक रूप से कमजोर बच्चों से संवाद के बाद उन्हें जरूरी सलाह दी जा सके। इसी तरह का संवाद 9 मई को बारहवीं कक्षा के बच्चों से होगा। 

जांच के क्रम में पहले दिन बच्चों से बात की गई। उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया गया है। आज के संवाद व बातचीत में काफी कुछ सामने आया है। उस पर विचार के बाद निर्णय लिया जाएगा। बाकी किसी भी स्तर पर समस्या नहीं रहने दी जाएगी। -सिस्टर ज्योत्सना, पूर्व प्रिंसीपल, ओएलएफ 

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इस संवेदनशील मामले में जो नहीं होना चाहिए वह हुआ

छात्रा की खुदकुशी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जो नहीं होना चाहिए वह हो रहा। कुछ न्यस्त स्वार्थी लोग इस मुद्दे पर सियासत कर रहे हैं, तो कुछ मरने वाली छात्रा के चरित्र हनन के कुत्सित प्रयास में जुट गए हैं। कथित तौर पर एक वीडियो भी सामने लाया जा रहा है। एक बार मान भी लें कि  कम उम्र की छात्रा भटक गई थी। सवाल उठता है कि अगर हमारी बहन-बेटी भटक गई तो क्या उससे जीवन का अधिकार छीन लेना चाहिए। क्या मौत और खुदकुशी ही एकमात्र रास्ता है। क्या उसे समझा-बुझाकर सही रास्ते पर लाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। जाहिर सी बात है कि छात्रा के मामले में ऐसा नहीं हुआ। कच्ची उम्र में भटकाव बहुधा हो जाता है। यह बहुत बड़ी और मनोवैज्ञानिक समस्या है। अच्छी बात यह है कि  स्कूल प्रबंधन ने यह बात समझी है और अब सही दिशा अख्तियार की है। हम समय को लेकर जरूर यह बात कह सकते हैं कि काश यह कदम पहले उठा लिया जाता तो शायद बच्ची को मौत को गले नहीं लगाना पड़ता।  

डांटने-मारने के बजाय बच्चों के हमदर्द बनें...समस्या सामने आने पर कहें...मैं हूं ना
मौजूदा समय में परिजनों की व्यस्तता और बच्चों से संवादहीनता बड़ी समस्या को जन्म दे रही है। जब आप बच्चों पर ध्यान नहीं देते। उनके लिए समय नहीं निकालते। संवाद नहीं करते तो किशोरवय में उनका भटकाव हो सकता है। स्कूल के साथ ही परिजनों का भी दायित्व है कि अपने बच्चों से संवाद बनाए रखें। उनके दोस्त बनकर उनकी समस्याओं पर बात करें। यदि कोई परेशानी है तो आप उसे डांटने-फटकारने और दंडित करने के बजाय इस बात का अहसास दिलाइए-मैं हूं ना।
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छात्र नेताओं ने बुलंद की आवाज

अलीगढ़ महानगर के रामघाट रोड के ओएलएफ (अवर लेडी फातिमा) स्कूल की छात्रा द्वारा आत्महत्या के बाद मुद्दा लगातार तूल पकड़ रहा है। अब बुधवार को छात्र नेताओं ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए एडीएम सिटी को ज्ञापन दिया है। नौ बिंदुओं पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराते हुए जांच की मांग की है। जांच पूरी होने तक प्रधानाचार्य को स्कूल से अलग रखने का अनुरोध किया है। साथ ही रामघाट रोड पर दिन में जाम के लिए जिम्मेदार स्कूल की पार्किंग भी स्कूल के अंदर कराने का अनुरोध किया है।

एबीवीपी के पूर्व प्रदेश मंत्री बल्देव चौधरी सीटू, जय यादव, तनिष्क प्रताप सिंह, सुमित प्रताप, इमरान खान, हेमराज, अमरेंद्र प्रताप, तोकीर आदि ने बुधवार दोपहर में एडीएम सिटी को ज्ञापन दिया। जिसमें विषय रखा कि छात्रा की आत्महत्या क्यों हुई, इसकी संपूर्ण जांच की जाए। छात्रों द्वारा प्रदर्शन कर लगाए गए आरोपों की जांच की जाए। जिला पुलिस प्रशासन द्वारा कमेटी बनाकर छात्रों के बयान लिए जाएं, ताकि सच सामने आ सके। स्कूल के गेट पर शिकायत पेटिका लगवाई जाए। स्कूल में तत्काल काउंसलर की तैनाती कराई जाए। समय-समय पर पुलिस प्रशासन के अधिकारी ओएलएफ सहित सभी स्कूलों में जाकर बच्चों से संवाद करें। 

स्कूल की छुट्टी के समय लगने वाले जाम के लिए जिम्मेदार स्कूलों के अंदर शत प्रतिशत पार्किंग की व्यवस्था कराई जाए। पूरे प्रकरण की जांच होने तक प्रधानाचार्य को अलग रखा जाए। एडीएम सिटी स्तर से छात्र नेताओं को सुना गया और उन्हें आश्वस्त किया गया। इस दौरान यह भी कहा गया कि स्कूल में कोई छात्रा अगर अपने साथी छात्र से बात कर रही है तो उसकी इतनी बड़ी सजा और इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए। पहले उनकी नीयत समझें। अगर, कुछ गलत लगे तो उन्हें समझाएं। तभी कोई कदम उठाएं। अन्यथा यह क्रम आगे भी जारी रह सकता है। अंत में दोषी पर कार्रवाई कर मिसाल पेश करने का अनुरोध किया गया।
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