बुलंदशहर के एक मंदिर में जिन दो साधुओं की हत्या हुई है उनमें एक शेर सिंह शरीर में कंपन की अनुवांशिक बीमारी के चलते साधु बने थे। उनके पिता किशोरीलाल को कंपन की बीमारी थी। यह बीमारी अनुवांशिक रूप से शेर सिंह और उनके दो भाई और बहनों में भी हो गई थी। बड़े भाई विजयपाल सिंह की इसी बीमारी के चलते शादी टूट गई थी, जबकि शेर सिंह और उनके छोटे भाई बबलू के लिए कोई रिश्ता नहीं मिला।
बरकातपुर में अपनी ननिहाल में जन्म लेने और रहने वाले शेर सिंह और उनके परिवार की आर्थिक स्थित बेहद कमजोर रही। पिता ससुराल बरकातपुर में ही रहते थे। वहीं सभी बच्चों का जन्म हुआ। ग्राम प्रधान सतेंद्र पाल सिंह के अनुसार भूमिहीन परिवार के इन सभी सदस्यों के शरीर में कंपन की बीमारी के चलते कोई मजदूरी के लिए भी नहीं रखता था। इस पर परिवार को अंत्योदय कार्ड मुहैया कराया गया। करीब चार साल पहले साधुओं की संगत में आने के बाद शेर सिंह ने साधु बनने का व्रत ले लिया था और बुलंदशहर में एक मंदिर में रहने लगे थे। करीब तीन माह पहले वह अपने गांव आए थे। परिवार में मां भागवती, बड़े भाई विजय सिंह, छोटे भाई बबलू हत्या की खबर पाकर बुलंदशहर गए हैं।