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अलीगढ़ः रिश्वत मांगने वालों के पीछे लगी एसएनटीएस सेल

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बैठक करते कमिश्नर गौरव दयाल साथ में डीएम सेल्वा कुमारी, कासगंज डी। - फोटो : CITY OFFICE
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प्रदेश सरकार की ओर से लागू जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लाभार्थियों को मिलने से पहले ही सुविधा शुल्क के नाम पर होने वाली उगाही को रोकने के लिए मंडलायुक्त गौरव दयाल ने एसएनटीसी (से नो टू करप्शन) सेल का गठन किया है। मंडलीय स्तर पर कार्यरत अर्थ एवं संख्या विभाग के अधिकारी इसका कामकाज संभाल रहे हैं। लोगों की फोन रिकार्डिंग, वीडियो रिकार्डिंग सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की संस्तुति की जा रही है। इसमें लाभार्थियों के फोन नंबर लेकर उनसे सीधे वार्ता की जा रही है कि उनसे किस विभाग के अफसर या बाबू ने क्या रिश्वत मांगी है। इस सेल के गठन के बाद से चार प्रकरणों में रिश्वत लेना सामने आया है। जिसमें संबंधित विभाग के आला अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिए हैं। मंडलायुक्त ने कहा है कि इन शिकायतों पर अगर संबंधित विभाग के अधिकारियों पर समय से कार्रवाई नहीं की तो वह अपनी जवाबदेही से बच नहीं पाएंगे। उनके विरुद्ध शासन स्तर पर रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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1- अलीगढ़ कलक्ट्रेट में एडीएम फाइनेंस कार्यालय से हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पटवारी ने 5500, मालबाबू ने 10 हजार और एक अन्य कर्मी ने चार हजार रुपये मांगे हैं। एडीएम फाइनेंस को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
2-एटा के सहायक निदेशक बेसिक शिक्षा कार्यालय में नवनियुक्ति सहायक अध्यापकों की सूची मांगने पर वहा के बिल बाबू ने तीन हजार रुपये मांगे। इस पर सहायक निदेशक और बीएसए को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
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3-अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अलीगढ़ मंडल / मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय अलीगढ़ में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों से पेंशन/ जीपीएफ व अन्य लाभ हासिल करने के लिए 40 हजार रुपये मांग गए। रिश्वत में यहां पर जीपीएफ का तीन प्रतिशत वसूला जा रहा है। आरोपी के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश सीएमओ को दिया गया है।
4-एडीएम फाइनेंस कार्यालय हाथरस में हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बाबू ने एक हजार रुपये और रजिस्ट्रर में चढ़ाने वाले ने 200 प्रति व्यक्ति मांगे। इस पर एडीएम फायनेंस हाथरस को कार्रवाई का निर्देश।
5-पांचवा मामला अलीगढ़ विकास प्राधिकरण से जुड़ा है। जिसमें मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए मोटी रकम वसूलने का आरोप है, लेकिन यहां के सचिव के स्तर से एसएनटीएस सेल को मानचित्र आवेदन करने वालों का नाम व नंबर नहीं दिया है। आवेदकों की जगह आर्किटेक्ट के नंबर दिए गए। इस पर विभागीय अधिकारियों को कार्रवाई करने को कहा गया है।
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