फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़ः कुछ ऐसा करें इंतजाम कि बच्चों को जाना ही न पड़े अस्पताल

विज्ञापन
मलखान सिंह जिला अस्पताल के भर्ती बच्चे। - फोटो : CITY OFFICE
विज्ञापन
कौशल कुमार ओझा
विज्ञापन

संभावित तीसरी लहर को लेकर हर कोई आशंकित है। सबसे अच्छा है कि अभिभावक स्वयं ऐसा व्यवहार अपनाएं कि बच्चों को अस्पताल जाना ही न पड़े। गंभीर मरीजों से निपटने के लिए कागज पर तो सारी तैयारी हो गई है, लेकिन हकीकत में अभी बहुत काम होना बाकी है।
पिछले एक महीने से अधिक समय से पीडियाट्रिक आईसीयू (पीकू) की तैयारी चल रही है। 15 जुलाई से पहले पीकू तैयार हो जाना था। पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में दीवारों को कार्टून कैरेक्टर एवं रंगीन फूल पत्तियों से सजा दिया गया है। बेड भी लगा दिए गए हैं। कमरा बहुत सुंदर नजर आ रहा है, लेकिन आईसीयू के लिए जरूरी सामान अभी नहीं लगाया गया है। बृहस्पतिवार को करीब आधा दर्जन वेंटिलेटर लगाए गए । दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए वेंटिलेटर बाहर से आने हैं। इसी तरह नेबुलाइजर, ईसीजी, बेड साइट एक्सरे, अल्ट्रासाउंड एवं अन्य जरूरी चीजें अभी लगने हैं। कुछ उपकरण बाहर से आएंगे, जिसका इंतजार है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 24 डॉक्टर एवं 60 स्टाफ नर्स की अग्नि परीक्षा अभी बाकी है। दूसरी लहर में ऑक्सीजन के अभाव में बहुतों की सांसे थम गई थीं। राहत की बात यह है कि पीकू के लिए 250 एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट तैयार है। मलखान सिंह जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में 20 बेड का आईसीयू बनना है, लेकिन वहां पर अभी कोई काम ही नहीं हुआ है।
विज्ञापन

बुजुर्ग, वयस्क के बाद बच्चों पर खतरा
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मेहरोत्रा कहते हैं कि तीसरी लहर में सबसे अधिक बच्चों को खतरा है। कारण यह है कि पहली लहर में सबसे अधिक बुजुर्ग चपेट में आए थे। उसके बाद फ्रंट लाइन वर्कर एवं बुजुर्गों को टीका लगाया गया। दूसरी लहर में सबसे अधिक वयस्क चपेट में आए थे। अब वयस्कों को भी टीका लग रहा है। अब यह साफ हो गया है कि टीका मौत से बचाता है। डॉ. विकास का कहना है कि देश में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की आबादी 50 करोड़ के करीब है। इनको टीका नहीं लगा है। विभिन्न देशों के अनुभव के आधार पर ही विशेषज्ञ तीसरी लहर को बच्चों के लिए खतरा मान रहे हैं।
हम सब मिलकर रोक सकते हैं खतरे को
डॉ. विकास मेहरोत्रा कहते हैं कि हम सब मिलकर प्रयास करें तो तीसरी लहर को रोक सकते हैं। इसके लिए हमें अपने व्यवहार में परिवर्तन करना होगा। हमें ऐसी आदत विकसित करनी होगी कि कोरोना घर तक पहुंचे ही नहीं और पहुंच भी जाए तो कम से कम खतरा हो। वह कहते हैं कि बहुत सारे लोगों में एंटीबॉडी बन गई है। हम समझ रहे हैं कि अब कोरोना से खतरा नहीं है, लेकिन यह गलत है। कामकाजी लोगों से संक्रमण घर तक पहुंचने एवं उससे बच्चों के संक्रमित होने का खतरा बना हुआ है। सबसे अधिक वयस्क लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। हर वह इंतजाम व सावधानी बरते, जिससे कोरोना घर तक नहीं पहुंचे। इसके साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य एवं इम्युनिटी पर ध्यान दें। खास ख्याल रखें कि बच्चों का वजन न बढ़े। अभी कक्षाएं बंद हैं और बच्चे ऑनलाइन क्लास कर रहे हैं। खेलकूद भी बंद हैं। बच्चों को घर में ही व्यायाम, योग व शारीरिक कार्य करने को प्रोत्साहित करें। लंस की क्षमता बढ़ाने के लिए गुब्बारा फुलाएं या इस तरह के अन्य अभ्यास करें।
पीडियाट्रिक आईसीयू की सारी तैयारी पूरी हो गई है। जेएनएमसी में 50 एवं पं. दीनदयाल अस्पताल में 47 बेड तैयार हैं। चार बाल रोग विशेषज्ञ सहित 24 डॉक्टर एवं 60 नर्स को प्रशिक्षण दिया गया है। ऑक्सीजन प्लांट तैयार है। मरीज आ जाएं तो हम भर्ती को तैयार हैं। जनपद के चार सीएचसी पर आईसीयू, आइसोलेशन एवं रिमेनिंग के लिए 120 बेड तैयार किए जा रहे हैं।
- डॉ. अनुपम भास्कर, प्रभारी सीएमओ
आज तक देश एवं प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की उपेक्षा हुई है। शुरू से ध्यान दिया गया होता तो पीकू, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर एवं ट्रेंड डॉक्टर एवं स्टाफ रखने की जरूरत ही नहीं पड़ती। देश में स्वास्थ्य बजट बहुत कम है। गलत नीतियों के कारण आज डॉक्टर डॉक्टरी छोड़कर सिविल सर्विसेज में जा रहे हैं। वातावरण इतना खराब हो गया है कि सरकारी सेवा में डॉक्टर जाना ही नहीं चाहते हैं।
- डॉ. भरत वार्ष्णेय, सचिव, आईएमए
ऑक्सीजन की कमी से मौत की बात सरकार नहीं स्वीकार रही है, जो हास्यस्पद है। दूसरी लहर में जिन लोगों के परिजनों की जान गई है, वह ऑक्सीजन की समस्या से अच्छी तरह परिचित हैं। राज्य सरकारों को संवेदनशीलता का परिचय देते हुए सही आंकड़े दिखाने चाहिए। अब तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। अब लोगों की जिम्मेदारी है कि वह स्वयं सावधान रहें। तीसरी लहर आई तो उसका ठीकरा पब्लिक के सिर पर फोड़ा जाएगा।
- डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा, सामाजिक कार्यकर्ता
पीकू में बेडों की संख्या
- जेएन मेडिकल कॉलेज - 50 (10 बेड आईसीयू)
- पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय - 47 (आईसीयू बेड 14, एसएनसीयू 10 एवं आइसोलेशन 23)
- मलखान सिंह जिला अस्पताल - 20 बेड
- सीएचसी अतरौली, खैर, चंडौस और इगलास में 30 बेड (आईसीयू 2-2 बेड, आइसोलेशन 10-10 बेड व अन्य
पीकू में चाहिए... प्रशिक्षित एवं विशेषज्ञ चिकित्सक, प्रशिक्षित तकनीशियन एवं नर्स, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन मास्क, नेबुलाइजर, ईसीजी, बेड साइट एक्सरे, अल्ट्रासाउंड आदि चाहिए। इसके अतिरिक्त 47 बेड के आईसीयू के लिए पर्याप्त मात्रा में डॉक्टर व स्टाफ चाहिए। पं. दीनदयाल अस्पताल के पीकू में 14 बेड का आईसीयू एवं 10 बेड का एसएनसीयू है। मानक के अनुसार 10 बेड पर 2 निश्चतेक चाहिए। तीन शिफ्ट में ड्यूटी के लिए कम से कम 6 निश्चेतक चाहिए।
विज्ञापन

चिकित्सकों की भारी कमी... जनपद में चिकित्सकों की भारी कमी है। सीएमओ के अधीन चिकित्सकों के 213 पर हैं, जिसमें से 155 खाली हैं। 108 पद विशेषज्ञ चिकित्सकों के हैं, अधिकतर खाली है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें