ऑनलाइन शिक्षा बच्चों के लिए फायदेमंद कम, नुकसानदेह ज्यादा साबित हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि ऑनलाइन शिक्षा से बच्चों के गले, गर्दन, रीढ़ की हड्डी, आंखों में जलन, चुभन व सुनने की क्षमता पर असर पड़ रहा है। अलबत्ता, बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा के रूप में इस्तेमाल होने वाले गजट उनके लिए समस्याएं बन चुके हैं, जो बाजार में नई संभावनाएं बना रही हैं। बाजार में मोबाइल की स्क्त्रस्ीन को बड़ा करने का गजट आ गया है। शरीर की संरचना को ठीक करने के लिए बेल्ट आ गए हैं। मोबाइल रखने के स्टैंड भी आ गए हैं। चिकित्सकों ने बताया कि बाजार में जो सामान उपलब्ध हैं, वह बच्चों के लिए फायदेमंद नहीं हैं। इसलिए बच्चों को इस्तेमाल करने की सलाह अभिभावकों को नहीं देते हैं। शारीरिक संरचना को ठीक रखने के लिए बेल्ट ठीक नहीं है, क्योंकि बच्चों की मांस पेशियां मुलायम होती हैं। इसी तरह मोबाइल की स्क्रीन पर शीशा लगाकर फांट को बड़ा करके पढ़ने की सलाह नहीं देते हैं।
जिले में स्कूलों की स्थिति
माध्यमिक शिक्षा विभाग के 794 विद्यालय हैं। इनमें राजकीय इंटर कॉलेज 33, अशासकीय सहायता प्राप्त 94, वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालय 667 हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के 2115 विद्यालय हैं। इनमें प्राइमरी 1382, जूनियर 358, कंपोजिट 375 विद्यालय हैं, जबकि विभाग से मान्यता प्राप्त करीब 75 से ज्यादा निजी विद्यालय हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के लगभग 70 विद्यालय हैं। इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन (आईसीएसई) के चार विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में लगभग छह लाख बच्चे पढ़ रहे हैं।
कई घंटे मोबाइल की स्क्रीन देखते हैं बच्चे
ऑनलाइन शिक्षा लेने के लिए कई घंटे तक बच्चे मोबाइल की स्क्रीन देखते हैं। प्री प्राइमरी के बच्चे दो कक्षाएं करते हैं, जो लगभग दो घंटे की होती है। इसी तरह कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के विद्यार्थी रोजाना चार कक्षाएं लगभग तीन घंटे तक करते हैं, जबकि कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थी लगभग चार घंटे में चार कक्षाएं करते हैं।
चिकित्सकों के बोल
ऑनलाइन शिक्षा से बच्चों का मनोवैज्ञानिक संतुलन बिगड़ रहा है। घंटों मोबाइल का इस्तेमाल करने से बच्चों के शारीरिक विकास पर असर पड़ रहा है। उनमें अनुशासनहीनता बढ़ती जा रही है। मोटापे की समस्या बढ़ने लगी है। तनाव, गुस्सा ज्यादा करने लगे हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगी है। बच्चों के माता-पिता को उनके मोबाइल पर नजर रखनी चाहिए।
-डॉ. विभव वार्ष्णेय, शिशु रोग विशेषज्ञ, किड्स केयर हॉस्पिटल, रामघाट रोड
ऑनलाइन शिक्षा से बच्चों के सिर में दर्द होने लगा है। पलक न झपकने से आंखों में सूखापन, खुजली, पानी आना, दूर का साफ न दिखाई देना, बार-बार आंख को रगड़ने की शिकायतें आ रही हैं। मोबाइल की जगह लैपटॉप, टैबलेट की स्क्रीन का इस्तेमाल बच्चे करें। चश्मा टेस्ट कराएं। आंखों की जांच रुटीन होनी चाहिए।
-डॉ. पारस सैनी, नेत्र रोग विशेषज्ञ, गांधी आई हॉस्पिटल के सामने
हर हफ्ते तीन-चार बच्चे ऑनलाइन शिक्षा से गर्दन-गले में तकलीफ की समस्या लेकर आ रहे हैं। मोबाइल, टैबलेट पर काफी बच्चे लेट कर पढ़ते हैं, कुछ की बैठने का तरीका सही नहीं होता है। इसलिए उनकी गर्दन व कंधों में दर्द होता है। धूप न मिलने से विटामिन डी की कमी आ रही है।
-डॉ. पराग शेखर, हड्डी रोग विशेषज्ञ, रेणुका हॉस्पिटल, मैरिस रोड
ऑनलाइन शिक्षा से बच्चों की सुनने की क्षमता पर थोड़ा असर पड़ रहा है। मोबाइल, टैबलेट से आवाज सुनाई नहीं देती है। इसलिए बच्चे एयरफोन का इस्तेमाल करते हैं और उसकी आवाज तेज कर लेते हैं। घर पर जो एयरफोन होते हैं, वह बड़ों के लिए होता है। उसकी आवाज बच्चे बढ़ा लेते हैं, जिससे उनके कानों में दर्द होता है।
-डॉ. नितिन अग्रवाल, कान, नाक, गला रोग विशेषज्ञ, विद्यानगर
केस-1
गूलर रोड गली नंबर-1 निवासी 12 वर्षीय आयुष वार्ष्णेय ऑनलाइन क्लास करने के लिए कई घंटे तक मोबाइल की स्क्रीन देखते हैं, जिससे उनकी आंखों में तकलीफ होने लगी। इसके बाद वह नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पारस सैनी के पास पहुंचे। डॉ. सैनी ने उन्हें दवाएं देने के साथ मोबाइल के इस्तेमाल करने का सही तरीका भी बताया।
केस-2
गर्दन व कंधे में दर्द की शिकायत लेकर 11 वर्षीय अंकित अपने अभिभावकों के साथ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. पराग शेखर के पास पहुंचे। अभिभावक ने बताया कि पिछले कई दिनों से उसे गर्दन व कंधों में दर्द हो रहा है। डॉ. पराग ने बच्चे की जांच की और दवाएं भी दीं। साथ ही उसे मोबाइल स्क्रीन देखने का सही तरीका बताया।