फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नहीं है कमाई... खुद खाएं या घोड़ों को खिलाएं

विज्ञापन
विज्ञापन
लगातार दूसरे साल कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के चलते बैंडबाजा कारोबार का बैंड बज गया है। सहालग में काम धंधा न मिलने से बैंड संचालक, हलवाई, डीजे, डेकोरेशन, गुब्बारे, घोड़ी-बग्घी, लाइटिंग, टेंट आदि काम करने वाले लोग परेशान हैं। उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
विज्ञापन

खासतौर पर घोड़ी संचालकों के सामने तो यह समस्या है कि कमाई नहीं है। वह अपने परिवार को खिलाएं या घोड़ों को। आठ-दस घोड़ी-घोड़े रखने वाले दाना-पानी तक का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। हालात यह हैं कि घोड़ों को खरीदने के लिए भी इस समय कोई तैयार नहीं है। ऐसी स्थिति में ये लोग धंधे को बदलने की तैयारी में हैं। ऐसा ही संकट बैंड संचालकों के सामने भी है। उनका कहना है कि पिछले साल मजदूरों को पूरा भुगतान किया था। हालात सामान्य होने पर मजदूरों को कर्ज लेकर भुगतान किया। लेकिन कोरोना के कारण सहालग में काम नहीं मिल रहा है। कमाई है नहीं। घर का खर्च चलाने में लाले पड़े हैं।
सहालग में काम न मिलने से आर्थिक संकट पैदा हो गया है। पुरानी सभी बुकिंग निरस्त हो गई हैं। अगस्त-सितंबर तक कोई कार्यक्रम नहीं आ रहा है। जबकि पिछले साल और इस बार मजदूरों को अग्रिम भुगतान कर चुके हैं। जबकि काम के नाम पर खाली बैठे हैं।
विज्ञापन

- पवन गुप्ता, अध्यक्ष बैंड एसोसिएशन।
सहालग में काम धंधा बंद रहने से हालात यह हो गए हैं कि दो घोड़ियों को बेच दिया है। अब आठ घोड़ियां बची हैं। कुछ अपना पेट काटते हैं, कुछ जानवरों का। बस इसी तरह समय काट रहे हैं। भगवान से प्रार्थना है कि ऐसे हालात कभी न दिखाए।
- कालीचरण उर्फ कलुआ, सराय हरनारायण।
आठ घोड़ी और उनके चार बच्चे हैं। एक जानवर की खुराक वैसे तो कम से कम 300 रुपये प्रतिदिन की है। जबकि 150 रुपये रोज में इनका पेट भर पा रहे हैं। 10 लोगों के परिवार के साथ जानवर भी खड़े-खड़े खा रहे हैं। यह देखा नहीं जा रहा है। इन्हें बेचकर धंधा बदलने की सोच रहे हैं।
- सलीम मुल्लाजी, देहलीगेट।
15 घोड़े-घोड़ियां थीं। इनमें से पांच घोड़ी और तीन घोड़े ही बचे हैं। कुछ ने पिछले साल तो कुछ जानवरों ने इस साल दम तोड़ दिया है। 300 रुपये प्रतिदिन का दाना-पानी खाने वाले जानवरों को अब 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से ही पेट भर पा रहे हैं। खरीदने के लिए भी कोई तैयार नहीं।
विज्ञापन

-मोहम्मद मुबीन, मदार गेट।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें