कोरोना वायरस के संबंध में प्लाज्मा थेरेपी द्वारा इंडियन मेडिकल काउंसिल ऑफ रिसर्च के ताजा दिशा निर्देश के बाद अब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में भी प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना वायरस संक्रमण के मरीजों का उपचार बंद कर दिया गया है। इंडियन मेडिकल काउंसिल ऑफ रिसर्च ने निर्देश जारी किए गए हैं कि अब प्लाज्मा थेरेपी कोरोना वायरस संक्रमण का उपचार नहीं है।
जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि अन्य बीमारियों में प्लाज्मा थेरेपी से उपचार जारी रहेगा। प्रोफेसर सिद्दीकी कहते हैं कि महामारी के दौरान आईसीएमआर द्वारा एक प्रयोग की प्रक्रिया शुरू की गई थी। जिसमें माना गया कि क्या अगर प्लाज्मा थेरेपी संक्रमण से ग्रस्त मरीजों को राहत दे सकती है? लेकिन अध्ययन में यह पाया गया कि यह थेरेपी संक्रमण ग्रस्त मरीजों के उपचार में बहुत ज्यादा कारगर साबित नहीं हो रही है। इसलिए ताजा दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। जिनका मेडिकल कॉलेज अनुसरण करता है।
प्रोफेसर सिद्दीकी कहते हैं कि जेएन मेडिकल कॉलेज में एक प्लाज्मा बैंक की स्थापना की गई। इस बैंक में ऐसा नहीं है कि प्लाज्मा को स्टोर करके रखा जा रहा हो। हम लोगों का नाम पता रजिस्टर में दर्ज कर लेते हैं और प्लाज्मा की आवश्यकता पड़ने पर उनसे संपर्क करते हैं।
प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग रीढ़ की हड्डी संबंधी बीमारियां, रक्त संबंधी कुछ बीमारियां और अन्य बीमारियों में होता है। इन बीमारियों से ग्रसित मरीज मेडिकल कॉलेज में आते रहते हैं। इनके उपचार के लिए हम प्लाज्मा दान कर्ताओं को समय-समय पर संपर्क करते रहते हैं। प्रोफेसर सिद्दीकी ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ दिनों में मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमण से ग्रस्त मरीजों के मामलों में कमी आई है।