इगलास क्षेत्र के बहुचर्चित फर्नेश कारोबारी सुरेंद्र जिंदल अपहरण कांड के मुख्य आरोपी कुख्यात अपराधी विनोद जाट के फिंगर प्रिंट के बाद अब वॉयस सैंपल का मिलान भी हो गया है। राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला से यह रिपोर्ट आ गई है। यह केश डायरी में शामिल कर दिया गया है और जल्द ही न्यायालय में पेश करने की तैयारी है। इससे साफ हो गया है कि विनोद जाट ने ही कारोबारी की पत्नी से मोबाइल पर बातचीत के दौरान फिरौती मांगी थी और रकम लेने के बाद ही सुरेंद्र जिंदल को छोड़ा था।
यह वाकया 16 जून का है, जब शीशियापड़ा के सुरेंद्र जिंदल अपनी कार से भौरा गोरवा इगलास स्थित फर्नेश कारखाने जा रहे थे, तभी उन्हें वर्दीधारियों ने अगवा किया था। बाद में उनकी पत्नी से फोन पर बातचीत कर 6 लाख रुपये फिरौती में मंगाए और रुपये लेकर शाम को उन्हें छोड़ा गया था। हालांकि डिमांड 20 लाख से शुरू हुई थी और बात 6 लाख पर थमी थी। मामले में छूटकर आने के बाद पुलिस को सूचना दी गई और एक पखवाड़े तक चली कवायद के बाद हाथरस के मुरसान महामौनी निवासी पुलिस के बर्खास्त सिपाही कुख्यात अपराधी विनोद जाट व उनके गैंग का नाम उजागर हुआ। कुछ अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और विनोद जाट व उसके साथी विनोद पथैना पर 50-50 हजार का इनाम हुआ। विनोद जाट ने आगरा में पुराने मुकदमे में सरेंडर कर दिया। बाद में पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया और गैंगेस्टर व एनएसए तक में कार्रवाई की।
इस मामले में पुलिस साक्ष्यों के दम पर सजा कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है। इसी क्रम में उस गाड़ी के फिंगर प्रिंट मिलान की रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल की गई, जिसमें सुरेंद्र जिंदल को बैठाकर घुमाया गया। उसे मजबूत साक्ष्य माना गया है। इसके बाद अब सबसे मजबूत साक्ष्य वॉयस मिलान भी पुलिस को मिल गया है। सीओ इगलास मोहसिन खान के अनुसार लक्ष्मी जिंदल और बदमाशों में मोबाइल पर हुई बातचीत की रिकार्डिंग और विनोद जाट के वॉयस सैंपल का मिलान राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला में हो गया है। उसकी रिपोर्ट मिल गई है, जिसे केश डायरी में शामिल कर दिया है और जल्द न्यायालय में भी दाखिल किया जाएगा। यह विनोद व उसके गैंग के खिलाफ बेहद मजबूत साक्ष्य होगा।
आवाज से ही विनोद जाट तक पहुंची थी पुलिस
जिस वक्त यह घटना हुई, उस वक्त पुलिस पर कोई क्लू अपराधियों तक पहुंचने के लिए नहीं था। बस बदमाशों का हुलिया, बोली भाषा व लक्ष्मी जिंदल के मोबाइल की वह रिकार्डिंग थी। इस रिकार्डिंग की मदद से पुलिस ने जब मुखबिरों से मदद ली तो एक सप्ताह के प्रयास में यह साफ हुआ था कि यह बातचीत विनोद जाट की है। तभी पुलिस इस अपहरण में विनोद जाट के पीछे लगी थी।
- पुलिस टीमों को लगातार यह निर्देश दिए जा रहे हैं कि संगीन अपराधों में अपराधियों के खिलाफ मजबूत से मजबूत साक्ष्य पेश कर उन्हें सजा कराई जाए। इस मामले में भी पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है और निश्चित सफलता मिलेगी।
- कलानिधि नैथानी, एसएसपी