मथुरा रोड स्थित ए टू जेड प्लांट में पुराने कूड़े का पहाड़
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एटूजेड प्लांट में पुराने कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए ड्रोन से सर्वे शुरू हो गया है। सर्वे के बाद कूड़े का निस्तारण किया जाएगा। यहां पर करीब एक लाख टन पुराने कूड़ा है। एटूजेड प्लांट में जियो मैट्रिक सोल्यूशन कंपनी ड्रोन के माध्यम से पुराने कूड़े का सर्वे कर रही है। बुधवार से सर्वे का काम शुरू हो गया है। हालांकि बरसात के कारण पहले दिन बीच में ही काम रोकना पड़ा। ड्रोन से जमा पुराने कूड़े की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई मापी जाएगी। उसके बाद कृति कंस्ट्रक्शन द्वारा कूड़े का निस्तारण किया जाएगा। एटूजेड के अधिकारी समय सिंह ने बताया कि सर्वे के बाद कृति कंस्ट्रक्शन द्वारा कूड़े को दो भागों में विभाजित किया जाएगा।
एक भाग में प्लास्टिक, जूते-चप्पल आदि होंगे। जबकि दूसरे भाग में मिट्टी एवं कंकड़-पत्थर में तब्दील हो चुके कूड़े होंगे। उसके बाद कंपनी द्वारा कूड़े का निस्तारण किया जाएगा। सर्वे के दौरान नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शिव कुमार, पीके शर्मा, विष्णु सिंह, राजकुमार, सत्यपाल सिंह, दयाशंकर तिवारी आदि मौजूद थे।
क्यों जमा हुए कूड़े...
प्लांट में अनुमानित तौर पर करीब एक लाख टन पुराने कूड़े हैं। दरअसल एटूजेड प्लांट में औसतन प्रत्येक दिन 435 टन कूड़े शहर से आता है, जबकि प्लांट की क्षमता 220 टन है। प्लांट द्वारा करीब 200 से लेकर 220 टन कूड़े को प्रोसेस कर खाद में तब्दील कर दिया जाता है। शेष कूड़ा पड़ा रह जाता है। यह क्रम वर्ष 2012-13 से चलता आ रहा है। इसकी वजह से कूड़े का पहाड़ बन गया है।