शहर के नामचीन सराफ व रीयल स्टेट कारोबारी की कोरोना संक्रमण से मौत उस दौर में हुई, जब वह अपनी मां की मौत के शोक में डूबे थे। जाहिर है लाख मना करने के बावजूद उनके पास लोगों संवेदना जताने के लिए आना जाना लगा था। कम्युनिटी संक्रमण से फैलने वाली इस बीमारी के दौर में उनके यहां लोगों की आवाजाही पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे के लिए चिंता का सबब बन गई है। टीमें अपने-अपने तरीके से उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं जो सराफा कारोबारी की मां की अंत्येष्टि में शामिल हुए। शुक्रवार सुबह तक 105 लोगों की एक और देर शाम तक 38 लोगों की दूसरी सूची तैयार हुई है।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार इन दोनों सूचियों में पुराने शहर के अलग-अलग कई मोहल्लों से जुड़े लोग शामिल हैं। उन लोगों को सूचना देकर और उनके घरों पर नोटिस चस्पा कर उन्हें क्वारंटीन कराया जा रहा है, साथ में इनकी सैंपलिंग की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस सूची में 50 के करीब सराफ परिवार के करीबी रिश्तेदार और काम करने वाले हैं। बाकी उनके शहर के सामाजिक, व्यापारिक व राजनीतिक संपर्कों के लोग हैं। सबसे खास बात है कि अब तक की जांच में लखनऊ से उनके भाई सहित तीन लोगों के ही आने की पुष्टि शुक्रवार को खुद सराफ परिवार ने की है, बाकी इससे ज्यादा लोगों के आने की बात को अफवाह करार दिया गया है।
वहीं सूची बनाने के काम में लगी टीमों से मिल रही जानकारी के अनुसार इस सूची में सासनी गेट, हाथरस अड्डा, बापूधाम, सारसौल, अचलताल, सराय हरनारायण, शाहपाड़ा, कृष्णा टोला, आगरा रोड, सराय जवां, सराय मान सिंह, इगलास कस्बा, आवास विकास कालोनी आदि इलाकों से जुड़े लोग शामिल हैं। यह सूची जिला प्रशासन द्वारा सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
पुलिस, स्वास्थ्य और प्रशासनिक टीमों के प्रयास व परिवार से मिली जानकारी के अनुसार अब तक 105 लोगों की सूची बनकर तैयार हो गई है। शेष सूची बनाने पर काम चल रहा है। सूची में अंत्येष्टि में शामिल लोगों के अलावा बाद में संवेदना जताने गए लोगों के नाम शामिल किए जा रहे हैं। कम्युनिटी संक्रमण रोकने के लिए इन सभी को क्वारंटीन करने के साथ-साथ जरूरत के आधार पर इनकी सैंपलिंग कराई जा रही है। इस सूची को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
-चंद्रभूषण सिंह, डीएम
त्रयोदशी संस्कार का शोर, मगर नहीं मिले साक्ष्य
पुलिस प्रशासन ने इस मामले में अंत्येष्टि के दिन की फुटेज जुटाकर मुकदमा दर्ज कर लिया है। शहर में बेशक त्रयोदशी के दिन लोगों के जुटने का शोर मचा हुआ है। मगर इस बात के कोई साक्ष्य अभी तक सामने नहीं आए हैं। यही वजह है कि मुकदमे में त्रयोदशी के दिन को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया है। यह बात खुद डीएम चंद्रभूषण सिंह ने स्वीकारी है कि हम लगातार अपने अधिकारियों को बैठक में यह तय करने के निर्देश दे रहे हैं कि जो भी कदम उठाएं वह साक्ष्य के आधार पर उठाएं।
जो साक्ष्य सामने आता है, उसी पर कार्यवाही कानून के अनुसार करें। कोई इस आड़ में किसी के साथ दुश्मनी भी निकाल सकता है। इसलिए बिना साक्ष्य कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। उन्होंने इस बात का उदाहरण तक दिया कि त्यागी हॉस्पिटल में दो माह पुरानी घटना को ताजा बताकर किसी ने दुश्मनी निकवालने के इरादे से वहां तीन दिन काम बंद करा दिया।
सूची में गुप्त रखे प्रमुख नाम, मगर मुकदमे से हलचल
अंतिम संस्कार में जिले के कई नामदार शामिल हुए हैं। इसलिए सूची बनाते समय इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि उनके नाम गुप्त रखे जा रहे हैं। इन लोगों को इशारों में बता दिया जा रहा है कि आप वहां गए थे, खुद ही क्वारंटीन हो जाएं। मगर आज लाकडाउन उल्लंघन का मुकदमा दर्ज होने के बाद इन नामदारों में हलचल मची हुई है। लोग तरह-तरह की चर्चाएं मुकदमा दर्ज होने के बाद कर रहे हैं।