कोरोना संक्रमण के घटते ग्राफ की वजह से जब स्कूल खुले तो अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने में हिचक रहे थे। लेकिन हेरिटेज इंटरनेशनल स्कूल प्रशासन ने अभिभावकों की काउंसिलिंग करते हुए उनसे बच्चों को स्कूल भेजने का अनुरोध किया। इसका असर भी हुआ।
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कोरोना महामारी में ऑफलाइन पढ़ाई ऑनलाइन हो गई थी। स्कूलों की तरफ से ऑनलाइन शिक्षा के लिए व्यापक बंदोबस्त किए गए थे। हेरिटेज इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधक सचिव डॉ. राकेश नंदन ने भी बच्चों के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म की व्यवस्था कराई। विषम परिस्थितियों में स्कूल प्रशासन ने बच्चों और अभिभावकों को कोरोना महामारी से उबरने के लिए प्रोत्साहित किया।
कोरोना काल के बाद बालक-बालिकाओं की उपस्थिति या अनुपस्थिति समान रही। कोरोना की पहली लहर का प्रभाव लगभग छह माह तक रहा, इसका असर पठन-पाठन पर पड़ा। उसके बाद धीरे-धीरे जिंदगी पटरी पर लौटने लगी। - मोहम्मद आसिम रूमी, प्रधानाचार्य, हेरिटेज इंटरनेशनल स्कूल