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30 साल बाद फिर कल-कल कर बहेगी नीम नदी

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नीम नदी में मजदूरों के साथ फावड़ा चलाते छर्रा विधायक रवेंद्र पाल सिंह। - फोटो : GANGIRI
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बुलंदशहर के डिबाई में काली नदी से निकलकर कासगंज के वीरसुआ गांव में काली नदी में मिलने वाली नीम नदी को अलीगढ़ के रास्ते पर पुनर्जीवन देने की कवायद शुरू हो गई है। मंगलवार को गंगीरी क्षेत्र के गांव मलसई और मखदूमनगर में नीम नदी की खुदाई और सफाई का काम शुरू हुआ। नीम नदी में फिर से पानी का बहाव रफ्तार पकड़ेगा तो उसके किनारे वाले गांवों में न सिर्फ जमीन का जलस्तर ऊपर आएगा बल्कि नदी किनारे पौधरोपण के जरिए हरियाली भी बढ़ेगी।
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मंगलवार को छर्रा विधायक ठा. रवेंद्र पाल सिंह व बीडीओ श्रेयस कुमार ने फावड़ा चलाकर नीम नदी को पुनर्जीवन देने की शुरुआत की। बीडीओ श्रेयस कुमार के अनुसार गंगीरी ब्लाक की 14 ग्राम पंचायतों से होकर नीम नदी निकली है। इसकी कुल लंबाई 27 किलोमीटर है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 30 साल पहले नीम नदी कल कल कर बहती थी। धीरे-धीरे यह नदी सिमटते हुए नाले के आकार में रह गई। अब बारिश के दिनों में ही कभी कभार नीम नदी में पानी आता है।
मजदूरों को भी रोजगार से जोड़ना मकसद
नीम नदी के पुनर्जीवन की हुई शुरुआत के पीछे मनरेगा और खासकर दूसरे प्रांतों से लॉकडाउन में अपने गांवों में लौटे मजदूरों को भी रोजगार से जोड़ना मकसद है। मंगलवार को मखदूमनगर ग्राम सभा में करीब 270 मनरेगा जाबकार्ड धारकाें को लगाकर काम शुरू कराया गया है। इनमें अन्य प्रांतों से लौटे 30 मजदूरों के जॉब कार्ड बनाकर नदी की खुदाई और सफाई के काम में लगाया गया है। नीम नदी की सफाई और खुदाई का यह काम एक माह तक चलेगा। इससे मजदूरों को भी काम और दाम मिलेगा।
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