एएमयू में पिछले 18 दिनों में एक छात्रा और छात्र की आत्महत्या ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों की आत्महत्या की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या परेशानी सामने आने से पहले ही उसकी पहचान करने और विद्यार्थियों तक मदद पहुंचाने की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है?
एएमयू प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद का कहना है कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को अपनी समस्या अधिकारियों तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था है। यदि किसी छात्र या छात्रा के परेशान होने का थोड़ा भी संकेत मिलता है तो विश्वविद्यालय की ओर से उससे संपर्क कर उसकी बात सुनी जाती है।
हाल की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
- इर्तिका समीर, अगस्त 2026 : दर्शनशास्त्र में बीए द्वितीय वर्ष की 19 वर्षीय छात्रा इर्तिका समीर का शव आईजी हॉल के कमरे में फंदे से लटका मिला था।
- इंतिहा फातिमा, जनवरी 2026 : एएमयू की छात्रा ने आत्महत्या का प्रयास किया था। गंभीर हालत में जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाने के बाद उनकी मौत हो गई थी।
- अदीबा तारिक, फरवरी 2026 : एएमयू के एबीके हाईस्कूल की कक्षा आठ की 14 वर्षीय छात्रा ने घर पर आत्महत्या की थी। पुलिस जांच में पारिवारिक तनाव की बात सामने आई थी।
- मोहम्मद शाकिर, फरवरी 2025 : एमए थियोलॉजी प्रथम वर्ष के 25 वर्षीय छात्र का शव परिसर स्थित हॉस्टल के कमरे के बाहर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था।