प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि अभी किसी प्रकार स्थिति को संभाला है लेकिन मेडिकल ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति बनी रहनी चाहिए। तभी यहां पर मरीजों के उपचार का काम सही तरीके से हो पाएगा।
मेडिकल कॉलेज के सूत्रों के मुताबिक सीसीयू वार्ड में सोमवार की सुबह ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप हो गई थी लेकिन उम्मीद थी कि दोपहर तक ऑप्शन मिल जाएगी।। दोपहर बाद पता चला कि पूरे जिले में ही गंभीर ऑक्सीजन संकट है। मेडिकल कॉलेज में खुद के ऑक्सीजन उत्पादन के दो प्लांट हैं, लेकिन जिले के अधिकांश निजी अस्पतालों में सिलेंडर वाली ऑक्सीजन की आपूर्ति के माध्यम से ही ऑक्सीजन दी जा रही है।
ट्रॉमा सेंटर में 150 मरीज ऑक्सीजन वाले बेड पर
जेएन मेडिकल कॉलेज में इस समय ओपीडी सेवाएं बंद हैं। केवल आपात सेवाएं ही चल रही हैं । यहां पर ट्रामा सेंटर में प्रतिदिन दो सौ मरीज आ रहे हैं। इनमें से 150 मरीज इस समय ऑक्सीजन वाले बेड पर हैं। इसके अलावा आइसोलेशन वार्ड और आईसीयू में भी ऑक्सीजन की आपूर्ति प्लांट के माध्यम से की जा रही है।