फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एएमयू बवाल: मानवाधिकार आयोग की टीम के सामने पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने दर्ज कराए बयान

विज्ञापन
विज्ञापन
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में 15 दिसंबर की रात जो कुछ हुआ, वह अप्रत्याशित था। हां, अंदरखाने यह इनपुट जरूर था कि कुछ साजिशकर्ता कैंपस का माहौल बिगाड़ने की कोशिश में हैं और लगातार छात्रों को भड़का रहे हैं।
विज्ञापन


मगर ऐसी उम्मीद न थी कि छात्र अचानक इस कदर आक्रामक हो जाएंगे। उग्र रुख अख्तियार कर बाब-ए-सैयद से निकलकर कैंपस से बाहर आने और फिर शहर की ओर कूच करने की कोशिश करेंगे। उन्हें जरूरी बल प्रयोग कर रोककर कुछ गलत नहीं किया।

अगर उन्हें न रोका जाता तो वह शहर की ओर कहां तक जाते? कुछ पता नहीं। शहर में घुसकर वह किससे टकराते? किस पर हमला करते? और उन पर कौन हमला करता? किसके चोट आती? कुछ कहा नहीं जा सकता? ऐसे में शहर को बचाना बेहद मुश्किल होता। कुछ इस तरह की मंशा जाहिर की है पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच टीम के सामने।
विज्ञापन


टीम के समक्ष 6 पुलिस व 2 प्रशासनिक अधिकारियों के बयान दर्ज हुए हैं। शेष के शुक्रवार को बयान दर्ज होंगे। आरएएफ के कुछ अधिकारी भी टीम के समक्ष सर्किट हाउस पहुंचे और बयान दर्ज कराने के लिए समय ले लिया। उम्मीद है कि शुक्रवार को आरएएफ व शेष पुलिसकर्मी अपने बयान दर्ज कराएंगे। इधर, बृहस्पतिवार को टीम ने घायलों का मेडिकल परीक्षण करने वाले दीनदयाल अस्पताल व मलखान सिंह जिला अस्पताल के डॉक्टरों को तलब कर उनके भी बयान दर्ज किए।
एनएचआरसी की जांच टीम के सामने बृहस्पतिवार को एक-एक कर पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर से बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि, बयान क्या दर्ज कराए गए, यह आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है। मगर, अंदरखाने जो बात छनकर आ रही है, उसके अनुसार सभी ने साक्ष्यों के साथ एक मत से यही कहा है कि उन्होंने क्या गलती कर दी। जो कुछ किया, छात्रों और शहर के हित को ध्यान में रखकर किया गया।
कई दिन से साजिशकर्ता माहौल बिगाड़ने को प्रयासरत थे। 13 दिसंबर को उनकी कलक्ट्रेट कूच की मंशा धरी रह गई। इनपुट व अब तक के साक्ष्यों के अनुसार 15 दिसंबर की देर शाम चंद लोगों ने मौलाना आजाद लाइब्रेरी में पहुंचकर छात्रों को झूठी अफवाह फैलाकर भड़काया।

कुछ ही देर में वहां संख्या दो से ढाई हजार एकत्रित हो गई, जिसमें बाहरी भी भारी संख्या में थे। जिन्होंने कैंपस से बाहर निकालकर हंगामा खड़ा करने की मंशा से पहले बाब-ए-सैयद तोड़ा फिर बाहर पुलिस पर हमलावर हो गए। बेहद कम संख्या में मौजूद पुलिस फोर्स ने जैसे-तैसे उन्हें रोका और सूचना पर तत्काल शेष पुलिस बल व अधिकारी वहां पहुंचे।

अगर उन्हें न रोका जाता तो वह सर्किल से आगे शहर में किसी भी दिशा में जाते। आगे जाने पर वह हमलावर होते या उन पर कोई हमलावर होता कुछ पता नहीं? कुल मिलाकर छात्रों व शहर का ज्यादा नुकसान होता।

दिन भर दो स्थानों पर यह रहीं टीम की गतिविधियां
बृहस्पतिवार को आयोग की टीम ने दो अलग अलग स्थानों पर बयान दर्ज कराने की व्यवस्था की गई थी। सर्किट हाउस में रैपिड एक्शन फोर्स, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बयान दर्ज कराने की व्यवस्था की गई थी। जहां सुबह से ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों का जमावड़ा रहा। दिन भर उनकी ओर से बयान दर्ज कराने की कवायद चलती रही। इस दौरान आरएएफ के अधिकारियों ने पहुंचकर समय लेते हुए शुक्रवार को आने के संकेत दिए। वहीं, शाम को सर्किट हाउस की टीम ने ही दीनदयाल अस्पताल व जिला अस्पताल के डॉक्टरों को तलब किया।
डॉक्टरों से उनका सवाल था कि आपने पुलिसकर्मियों या गिरफ्तार छात्रों/युवकों के जो मेडिकल परीक्षण किए, उनकी चोटों का प्रकार क्या था। वहीं लोक निर्माण विभाग के पुराने गेस्ट हाउस में आम लोगों के लिए बयान की व्यवस्था की गई थी। इसी क्रम में अधिवक्ता खुर्शीदउर रहमान भी आयोग की टीम के समक्ष बयान देने पहुंचे। वह नागरिकता संशोधन कानून के सन 2014 के प्रावधानों की रोशनी में अपनी बात कहने पहुंचे थे। इसके अलावा यहां एक दर्जन छात्रों व हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता असद हयात आदि ने पहुंचकर बयान दर्ज कराए। साथ में तमाम साक्ष्य भी पेश किए।
पुलिस से तलब किए फॉरेंसिक साक्ष्य
जांच टीम ने पुलिस से फॉरेंसिक साक्ष्य भी तलब किए हैं। इन फॉरेंसिक साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि पथराव, लाठीचार्ज या टीयर गैस सेल फेंके जाने के बाद क्या मंजर बना। मौके पर क्या-क्या साक्ष्य मिले। पथराव से जो क्षतिग्रस्त हुआ, उसका तरीका क्या था। उम्मीद है कि पुलिस स्तर से शुक्रवार को यह साक्ष्य भी पेश किए जाएंगे।
अभी और कुछ दिन रुक सकती है जांच टीम
पुलिस प्रशासन के बयान दर्ज होने की प्रक्रिया बृहस्पतिवार से शुरू हुई है। टीम की ओर से अभी तक जो कार्यक्रम प्रस्तावित था, उसके अनुसार शुक्रवार को टीम को वापस जाना था। मगर चूंकि अभी पुलिस प्रशासनिक स्तर से सभी बयान दर्ज नहीं हुए हैं। शुक्रवार को अच्छी खासी संख्या में बयान दर्ज होने की उम्मीद है। ऐसे में उनके बयान शायद पूरे न हो पाएं। ऐसे में संकेत हैं कि टीम कुछ दिन और रुक सकती है। या फिर शुक्रवार को जाकर एक दो दिन में फिर वापस लौटेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें