ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद राहत अधूरी
आवेदकों का कहना है कि आवेदन की स्थिति, आपत्ति और प्रमाणपत्र जारी होने की जानकारी ऑनलाइन स्पष्ट रूप से मिलनी चाहिए, ताकि हर छोटी जानकारी के लिए नगर निगम न आना पड़े।
बोले आवेदक
बेटी का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अप्रैल 2026 में आवेदन किया था। नियमानुसार 30 दिन में प्रमाणपत्र जारी होना चाहिए था, लेकिन अभी तक नहीं बना। हर बार कभी सर्वर डाउन तो कभी साइट बंद होने की जानकारी दी जाती है।-मोहसिन, मखदूम नगर
पोती के जन्म प्रमाणपत्र के लिए मई में आवेदन किया था। अभी तक रिपोर्ट लगकर नहीं पहुंची है। हर बार काउंटर पर अलग समस्या बता दी जाती है।-मुनीरुद्दीन, रजा नगर
बेटे के जन्म प्रमाणपत्र के लिए अप्रैल में आवेदन किया था। पांच महीने से भटक रहे हैं। कभी साइट नहीं चलने तो कभी सर्वर डाउन होने की बात कही जाती है।-इमरान, सुपर कॉलोनी
एक साल से अधिक पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए शहर में नामित मजिस्ट्रेट के यहां से रिपोर्ट आती है। जांच में देरी के कारण प्रमाणपत्र जारी करने में विलंब हो रहा है। बाकी प्रमाणपत्र निर्धारित समय में जारी किए जा रहे हैं।-तपस्या यादव, सहायक नगर आयुक्त
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के नियम
- 21 दिन के भीतर सूचना देने पर नगर निगम द्वारा मुफ्त प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
- 21 से 30 दिन के भीतर निर्धारित विलंब शुल्क के साथ पंजीकरण होता है।
- 30 दिन से एक वर्ष के भीतर जिला रजिस्ट्रार या मुख्य चिकित्सा अधिकारी की लिखित अनुमति और लेट फीस के साथ प्रमाणपत्र बनता है।
- एक वर्ष से अधिक की देरी पर मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी होती है।
- दो वर्ष से पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।