ईद-उल-अजहा पर एक दूसरे को बधाई देते बच्चे ।
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बकरीद का त्योहार शनिवार को सादगी से मनाया गया। शाहजमाल ईदगाह, जमालपुर ईदगाह, ऊपरकोट जामा मस्जिद, एएमयू जामा मस्जिद में नमाज ए चाश्त पढ़ी गई। कोरोना संक्रमण काल के कारण प्रशासनिक सलाह पर सामूहिक नमाज और सामूहिक कुर्बानी नहीं हुई। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक मस्जिदों में इमाम, मौलवी और अन्य लोगों ने पांच-पांच के गुट में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ नमाज अदा की। शहर मुफ्ती ने भी परिवार संग नमाज अदा की। सुबह पांच बजे की फज्र की नमाज के बाद लोगों ने बकरीद की नमाज अदा की।
इस दौरान बच्चों ने नये कपड़ों और लजीज व्यंजनों का लुत्फ उठाया। नमाज के बाद लोगों ने कुर्बानी देकर अपना फर्ज पूरा किया। कुर्बानी देने के बाद उसके तीन हिस्से किए गए। पहला अपने लिए, दूसरा रिश्तेदारों के लिए और तीसरा गरीबों में बांटने के लिए दिया गया। बकरों को हरे पत्ते बेचने वालों को भी कई जगहों पर तीसरे हिस्से का दान मिला। दोदपुर निवासी महेश परिवार संग बकरो के लिए हरे पत्ते बेच रहे थे। उनको भी कुछ लोगों ने कुर्बानी का हिस्सा दिया।
शहर मुफ्ती खालिद हमीद ने कहा कि कुर्बानी देने के बाद खालों को दान कर दें। अगर दान में नहीं जा रही है तो उसको पास के कब्रिस्तान में कायदे से दफना दें। जिससे वह बाहर नहीं निकल पाए। कुर्बानी देने वाले साफ-सफाई का ध्यान रखें। कुर्बानी में मदद करने वाले दो जोड़ी कपड़े लेकर चलें। साफ सफाई का ध्यान रखकर कोरोना के संक्रमण से दूर रहें। पड़ोसी का भी ध्यान रखें। जरूरतमंदों को यथासंभव मदद दें, जिससे उनका चूल्हा भी जलता रहे।
इस दौरान शाहजमाल, ऊपरकोट जामा मस्जिद, जमालपुर ईदगाह के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रहा। यहां बैरीकेडिंग लगाई गई थी। सुबह 11 बजे के बाद लोगों को अनावश्यक घूमने से रोका गया। इस दौरान मास्क नहीं लगानेे, हेल्मेट नहीं पहनने, बाइक पर तीन लोगों के सवार होने पर चालान भी काटे गए। ई रिक्शा और कार से घूमने वालों को भी रोका गया, क्योंकि दो दिनी लॉकडाउन का शनिवार को पहला दिन था।