युद्ध एवं चुनाव बड़ी सावधानी से लड़ना चाहिए। थोड़ी सी चूक से इंग्लैंड के लीड्स यूनिवर्सिटी से एमटेक एवं आर्स्टन यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल करने वाले सपा प्रत्याशी जसवंत सिंह यादव अलीगढ़ स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन 2022 में गच्चा खा गए और भाजपा अपनी रणनीति में कामयाब हो गई। अब भाजपा के इंटर पास प्रत्याशी ऋषिपाल सिंह का एमएलसी बनना तय है।
विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद भाजपा नेताओं का मनोबल सातवें आसमान पर है। अलीगढ़ स्थानीय प्राधिकरण विधान परिषद निर्वाचन 2022 में यह जोश एवं उत्साह बोल रहा है। भाजपा के रणनीतिकारों ने पहले ही तय कर लिया था कि चुनाव को आमने-सामने का बनाना है। यानी भाजपा एवं सपा की सीधी लड़ाई। जिले की राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी ठाकुर जयवीर सिंह, लोकदल नेता चौधरी सुनील सिंह के करीबी योगेश शर्मा एडवोकेट और भाजपा नेता आरपी सिंह मुख्य रणनीतिकार के रूप में सामने आए। लखनऊ में बैठे पार्टी के शीर्ष नेता कमजोर कड़ियों को जोड़ने में लगे रहे। सांसद सतीश गौतम और राजवीर दिलेर के साथ ही कई विधायकों को इस मिशन पर लगाया गया। पहला लक्ष्य चौधरी सुनील सिंह को चुनाव मैदान से हटाना एवं उनका समर्थन लेना था। सुनील सिंह एमएलसी चुनाव के मंजे खिलाड़ी हैं। एक बार एमएलसी रहे हैं। उनके पिता चौधरी राजेंद्र सिंह भी एमएलसी निर्वाचित हुए थे। 2016 के चुनाव में सुनील सिंह ने सपा प्रत्याशी जसवंत सिंह एवं उसके पूर्व के चुनाव में मुकुल उपाध्याय को कड़ी टक्कर दी थी। पिछले छह साल से वह चुनाव की तैयारी भी कर रहे थे।
भाजपा का आधा काम तो उसी दिन हो गया, जिस दिन स्व. राजेंद्र सिंह के समय से इस परिवार के करीबी योगेश शर्मा एडवोकेट के सुझाव पर सुनील सिंह मैदान से हटने के लिए तैयार हो गए। उसके बाद भाजपा के रणनीतिकारों ने प्रधान संगठन के नेताओं को साधा और उन्हें रास्ते से हटाने में कामयाब भी हुए। इसका नतीजा यह निकला कि भाजपा के अतिरिक्त सिर्फ सपा प्रत्याशी का नामांकन हुआ। भाजपा यही चाहती भी थी। सपा प्रत्याशी की रणनीति एवं कमियों पर भाजपा नेता पहले से नजर रखे थे। पार्टी लाइन से अलग हटकर व्यक्तिगत संपर्कों का भी सहारा लिया गया। हाथरस जनपद के एक पूर्व विधायक का भी सहयोग लिया गया। इसमें भी प्रयास जयवीर सिंह व योगेश शर्मा के स्तर से किए गए। चौधरी ऋषिपाल सिंह तीन सेट में तो सपा प्रत्याशी जसवंत सिंह ने सिर्फ एक सेट में नामांकन दाखिल किया था। नामांकन के बाद भाजपा प्रत्याशी चौधरी ऋषिपाल सिंह ने सपा प्रत्याशी के प्रस्तावकों के हस्ताक्षर पर आपत्ति कर दी। दो प्रस्तावक तो सामने आ गए, लेकिन तीसरा भूमिगत हो गया। नतीजा सबके सामने है। बुधवार को सपा प्रत्याशी का नामांकन खारिज हो गया। अब भाजपा प्रत्याशी चौधरी ऋषिपाल सिंह का निर्विरोध निर्वाचन तय है।