मुनीर मेहताब ने अलीगढ़ में भी खूब दहशत फैलाई है। एक नहीं तीन - तीन हत्याएं तो ऐसी हैं, जिनमें उसका नाम उजागर हुआ और आज भी मुकदमे अदालतों में विचाराधीन हैं। वहीं खुद उसने पूछताछ में दो ऐसी हत्याएं स्वीकारीं, जिनमें उसका नाम नहीं आया।
शनिवार को जब उसको फांसी की खबर आई तो गिरफ्तार करने वाली टीम सहित पीड़ित परिवारों के चेहरों पर खुशी आई। पीड़ित परिवारों को उम्मीद जागी है कि अब उन्हें भी न्याय मिलेगा। वहीं गिरफ्तारी टीम के नेतृत्व कर्ता इंस्पेक्टर ने माना है कि अब उसकी मेहनत सफल हुई है। मुनीर पर सभी शहरों मे 37 मुकदमे हैं।
बिजनौर में एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना की सनसनीखेज हत्या को अंजाम देने वाले पश्चिमी यूपी के इस कुख्यात अपराधी का अलीगढ़ से गहरा नाता है। यहां इसने अपराध की एबीसीडी सीखी।
फिर पश्चिमी यूपी के साथ-साथ लखनऊ और दिल्ली तक में सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देकर पुलिस को चकरघिन्नी बनाया। 25 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में नाम कमाने और शोक पूरे करने के लिए ज्यादातर सनसनीखेज अपराध स्वीकार किए हैं।
एसटीएफ से संबद्ध टीम अलीगढ़ ने किया था मुनीर गिरफ्तार
एएमयू के छात्र गुटों की अदावत में सक्रिय मुनीर और उसके बेहद करीबी दोस्त आशुतोष मिश्रा के नाम अलीगढ़ पुलिस की सुर्खियों में आए। कारोबारी फहद की हत्या के बाद अलीगढ़ पुलिस आशुतोष की गिरफ्तारी में सफल रही और मुनीर चकमा दे गया। इसी बीच फरारी में उसने एएमयू छात्र आलमगीर की हत्या की और रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर की हत्या कर पिस्टल लूटी।
इसी बीच 2 अप्रैल 2016 को तंजील दंपती की हत्या में उसका नाम सामने आया। इस पर देश की तमाम एजेंसियां उसके पीछे लगीं। मगर सफलता नहीं मिल रही थी। ऐसे में मुनीर की गिरफ्तारी के लिए अलीगढ़ पुलिस में तैनात तेजतर्रार मुखबिर नेटवर्क वाले इंस्पेक्टर अजय कौशल, एसओजी में कार्यरत राकेश यादव, दुर्विजय सिंह व फिरोज खान को एसटीएफ लखनऊ यूनिट से संबद्ध किया गया।
इन चारों ने दो महीने के प्रयास के बाद मुनीर को 26 जून को नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर के एक मकान से दबोच लिया। आरोप है कि तंजील की हत्या जरूर निजी दुश्मनी में की। बाकी हत्याएं व अन्य अपराध दोस्तों की अदावत में की ।
आज तक न मिला टीम को पुरस्कार
इस गिरफ्तारी के बाद डीजीपी स्तर से दो लाख के इनाम की घोषणा हुई। मगर आज तक वह इनाम नहीं मिल सका। वर्तमान में इंस्पेक्टर मथुरा जनपद में, जबकि राकेश यादव हाथरस, दुर्विजय आगरा और फिरोज नोएडा में तैनात हैं।
अब लगा कि मेहनत हुई सफल: अजय कौशल
मथुरा में तैनात इंस्पेक्टर अजय कौशल बताते हैं कि जब उन्हें एसटीएफ के तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक ने बुलाकर यह टॉस्क दिया तो लगा कि यह बेहद जटिल काम है। मगर उन्होंने बिना झिझक खुद पर जताए गए भरोसे पर खरा उतरने के लिए जिम्मा निभाना तय किया।
अपने साथ तीन साथियों की टीम शामिल की और मिशन पर लग गए। नेपाल में मुनीर की खबर मिली मगर वह हाथ नहीं लगा। उसका करीबी शूटर अतीउल्ला नेपाल में हाथ लगा। टीम का एक मात्र निशाना मुनीर था इसी बीच एक दिन बड़ी सटीक खबर मिली कि वह मुंबई के रास्ते दुबई भागने की फिराक में है। इस सूचना पर नोएडा से उसे गिरफ्तार कर लिया । आज उसे फांसी की खबर सुन लगा है कि मेहनत सफल हुई।
न रखता था मोबाइल, न करता था संपर्क
गिरफ्तारी के लिए लगातार दो महीने तक परेशान रही टीम के सामने मुनीर को पकड़ना बड़ी चुनौती थी। वह न तो मोबाइल रखता था और न किसी से संपर्क करता था। जब भी उसे किसी से बात करनी होती थी तो सीधे उसके पास पहुंचकर बात करता था। इस दौरान मुनीर के कुछ ऐसे संपर्क टीम ने रडार पर लिए, जिनके विषय में उम्मीद थी कि कभी तो मिलने आएगा। बस उसी सहारे यह सफलता मिली थी।
आलमगीर - फहद हत्याकांड में हो सकता है निर्णय
अलीगढ़ में उस पर नौ मुकदमे विचाराधीन हैं। मगर दो ऐसे हैं, जो निर्णय के बेहद करीब हैं। एडीजे फास्ट ट्रैक न्यायालय में लंबित सिविल लाइंस के कारोबारी फहद हत्याकांड में सिर्फ पिस्टल बरामदगी करने वाले विवेचक की गवाही होना शेष है। इसी तरह एएमयू छात्र आलमगीर हत्याकांड में भी आखिरी विवेचक, जिन्होंने हथियार बरामद किया था। उनकी गवाही शेष है। दोनों मुकदमों में एक ही विवेचक गवाह तत्कालीन इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सुनील कुमार हैं। जिनकी तलबी न्यायालय से जारी है। मुनीर की पेशी अलीगढ़ न्यायालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये होती है।
सीसीटीवी फुटेज डिलीट कराने से पुलिस को मिला सुराग
मुनीर के फरार होने के बाद रैय्यान को पकड़े जाने का डर लगा तो वह एक मोबाइल रिचार्ज करने की दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज डिलीट कराने के लिए पहुंच गया था। बस यहीं से पुलिस के हाथ सुराग लगा और रैय्यान को धर दबोचा गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार मुनीर ने रैय्यान से पूछा था कि क्या तंजील आया है। रैय्यान ने तंजील के आने की जानकारी दे दी। इसके बाद ही मुनीर ने रैय्यान को संग लेकर दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया। मुनीर हत्याकांड को अंजाम देने के लिए चार पिस्टल लेकर आया था, जिसमें दो रैय्यान को देकर बाइक पर बैठाया।
रैय्यान को पहनने के लिए अपनी शर्ट भी मुनीर ने ही दी थी। इस दौरान रास्ते में एक मोबाइल रिचार्ज करने की दुकान में सीसीटीवी कैमरे लगे थे, रैय्यान को लगा कि वह उसमें कैद हो गए हैं। उसने दुकानदार पर फुटेज डिलीट करने का दबाव बनाया। इसी से पुलिस को सुराग लगा और उसे पकड़कर पूछताछ की तो पूरी घटना का खुलासा हो गया। संवाद
न्यायालय में अलीगढ़ के ये मुकदमे विचाराधीन
1-एएमयू छात्र तल्हा पर हमला किया गया
2-पीडब्ल्यूडी ठेकेदार से क्वार्सी में पिस्टल लूट
3-सिविल लाइंस इलाके में पल्सर बाइक लूट
4-मीनाक्षी पुल पर 32 लाख रुपये की लूट की
5-रेलवे रोड पर 35 लाख रुपये की लूट की।
6-सिविल लाइंस में कारोबारी फहद की हत्या।
7-क्वार्सी में तालसपुर प्रधान की पिस्टल लूटी।
8-पान दरीबा में सिपाही की हत्या, पिस्टल लूट।
9-एएमयू छात्र आलमगीर की दिनदहाड़े हत्या।