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अलीगढ़ : लाल डिग्गी तालाब के घाट पर हो रहा इमारत का ‘अवैध’ निर्माण

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लालडिग्गी स्थित तालाब पर होता निर्माण। - फोटो : CITY OFFICE
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कौशल कुमार ओझा
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सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश है कि प्राकृतिक जल स्रोत का स्वरूप किसी भी दशा में बदला नहीं जा सकता है, लेकिन नगर निगम सिविल लाइन क्षेत्र स्थित लालडिग्गी तालाब के घाट पर बहुमंजिली इमारत का निर्माण करा रहा है। चारों ओर घेराबंदी करके यह निर्माण कराया जा रहा है ताकि अंदर क्या हो रहा है, किसी को पता न चल सके। नगर निगम पर आरोप है कि तालाब के कुछ हिस्से पर कब्जा कर निर्माण कराया जा रहा है। शहर के पर्यावरण प्रेमी ने इसकी शिकायत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है। हालांकि, नगर निगम तालाब की जमीन पर निर्माण से इनकार कर रहे हैं। लाल डिग्गी स्थित तालाब करीब 100 वर्ष से अधिक पुराना है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एवं मुख्यमंत्री से की गई अपनी शिकायत में पर्यावरण प्रेमी अंशु गौड़ ने कहा कि सिविल लाइन क्षेत्र में लाल डिग्गी तालाब 16 बीघा 2 बिस्वा में फैला भूगर्भ जल का बहुत बड़ा स्रोत है। पिछले तीन-चार महीने से ऊं ची घेराबंदी कर तालाब को मिट्टी डालकर पाटा जा रहा है। वहां पर अवैध निर्माण चल रहा है। अलीगढ़ शहर में भूगर्भ जल की स्थिति पहले से ही दयनीय है। उन्होंने एनजीटी व मुख्यमंत्री से निर्माण रुकवाने की मांग की है।
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भूगर्भ जल संरक्षण की दिशा में सर्वोच्च न्यायालय ने भी (रिट संख्या 4787/2001 हिंचलाल तिवारी बनाम कमला देवी) प्राकृतिक भूगर्भ जल के स्रोतों तालाब, जलाशय, पोखर, डूब स्थान, कुएं, बावड़ी, प्राकृतिक नाले, प्राकृतिक नहर के लिए स्पष्ट आदेश किया हुआ है कि उक्त सभी भूगर्भ जल के स्रोतों का स्वरूप किसी भी दशा में बदला नहीं जा सकता है। अगर किसी भी अवैध निर्माण या जलाशय को पाटा गया तो तुरंत ही दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर उन सभी स्रोतों को उनकी यथार्थ स्वरूप में वापस लाकर स्थापित किया जाए।
- अंशु गौड़, पर्यावरण प्रेमी
हम अपनी भूमि के एक चौथाई भाग में ही निर्माण कर रहे हैं। न तो तालाब की जमीन पर निर्माण कर रहे है और न ही उसके स्वरूप व क्षेत्र में कोई परिवर्तन कर रहे हैं। काम पूरा होने के बाद तालाब चौड़ा होगा। तालाब को गहरा भी करा रहे हैं। वहां पर सात मंजिला इमारत बनेगी, जो शहर की सिग्नेचर बिल्डिंग होगी। उसी ग्रीन बिल्डिंग में स्मार्ट सिटी का कार्यालय एवं आईसीसीसी होगा। सारा कुछ सौर ऊर्जा से संचालित होगा। तालाब के पानी को शुद्ध व साफ रखने के लिए एरिएटर लग रहा है। कब्जा व स्वरूप परिवर्तन का आरोप सही नहीं है। हम तालाब को बेहतर बना रहे हैं। 2012 से उस जमीन पर भू माफिया की नजर है।
- सत्य प्रकाश पटेल, नगर आयुक्त
लोहे की दीवार लगाकर तालाब के घाट पर बहुमंजिले इमारत का निर्माण
सबहेड...
भूमाफिया के खिलाफ अभियान चलाने वाला नगर निगम सवालों के घेरे में
प्वाइंटर...
स्मार्ट सिटी कार्यालय के साथ-साथ इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर हो रहा तैयार, ग्रीन ट्रिब्यूनल एवं सीएम से शिकायत
कौशल कुमार ओझा
अलीगढ़। सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश है कि प्राकृतिक भूगर्भ जल स्त्रोतों का स्वरूप किसी भी दशा में बदला नहीं जा सकता है। परंतु महानगर के सिविल लाइन क्षेत्र स्थित लालडिग्गी तालाब के घाट पर बहुमंजिले इमरात का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। पूरे तालाब को लोहे की दीवार से ढक दिया गया है ताकि अंदर क्या हो रहा है, किसी को पता नहीं चलें। यह भी आरोप लग रहा है कि तालाब के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर निर्माण हो रहा है। शहर के पर्यावरण प्रेमी इससे मर्माहत है। इसकी शिकायत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक से किया जा चुका है। नगर निगम के अधिकारी तालाब की जमीन पर निर्माण से इनकार कर रहे हैं।
दिलचस्प पहलू यह है कि भूमाफिया के खिलाफ अभियान चलाने वाले नगर निगम के अधिकारियों पर तालाब पर अतिक्रमण व निर्माण का आरोप लग रहा है। लाल डिग्गी स्थित तालाब करीब 100 वर्ष से अधिक पुराना है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एवं मुख्यमंत्री से पर्यावरण प्रेमी अंशु गौड़ ने शिकायत की है और नगर निगम के कब्जे से तालाब को बचाने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि सिविल लाइन क्षेत्र में लाल डिग्गी तालाब -16 बीघा 2 बिस्वा में फैला-भूगर्भ जल का बहुत बड़ा स्त्रोत है। पिछले तीन-चार महीने से लोहे की दीवार लगाकर तालाब को मिट्टी डालकर पाटा जा रहा है। वहां पर अवैध निर्माण चल रहा है। अलीगढ़ शहर में भूगर्भ जल की स्थिति पहले से ही दयनीय है। तालाब पर अवैध निर्माण पाप एवं गुनाह है।
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भूगर्भ जल संरक्षण की दिशा में सर्वोच्च न्यायालय ने भी -रिट संख्या 4787/2001 हिंचलाल तिवारी बनाम कमला देवी- प्राकृतिक भूगर्भ जल के स्रोतों तालाब, जलाशय, पोखर, डूब स्थान, कुएं, बावड़ी, प्राकृतिक नाले, प्राकृतिक नहर के लिए स्पष्ट आदेश किया हुआ है उक्त सभी भूगर्भ जल के स्रोतों का स्वरूप किसी भी दशा में बदला नहीं जा सकता है। अगर किसी भी अवैध निर्माण या जलाशय को पाटा गया तो तुरंत ही दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर उन सभी स्रोतों को उनकी यथार्थ स्वरूप में वापस लाकर स्थापित किया जाए।
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- अंशु गौड़, पर्यावरण प्रेमी
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हम अपनी भूमि के एक चौथाई भाग में ही निर्माण कर रहे हैं। न तो तालाब की जमीन पर निर्माण कर रहे है और न ही उसके स्वरूप व क्षेत्र में कोई परिवर्तन कर रहे हैं। आप देखेंगे वहां काम पूरा होने के बाद तालाब चौड़ा होगा। तालाब को गहरा भी करा रहे हैं। वहां पर सात मंजिला इमारत बनेगा जो शहर का सिग्नेचर बिल्डिंग होगा। उसी ग्रीन बिल्डिंग में स्मार्ट सिटी का कार्यालय एवं आईसीसीसी होगा। सारा कुछ सौर ऊर्जा से संचालित होगा। तालाब के पानी को शुद्ध व साफ रखने के लिए एरिएटर लग रहा है। कब्जा व स्वरूप परिवर्तन का आरोप सही नहीं है। हम तो तालाब को बेहतर बना रहे हैं। 2012 से उस जमीन पर भू माफिया की नजर है।
- सत्य प्रकाश पटेल, नगर आयुक्त
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