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एएमयू का गुस्सा कन्नूर विश्वविद्यालय में निकला

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कौशल ओझा
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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से लेकर केरल के कन्नूर विश्वविद्यालय तक में घमासान मचा हुआ है। प्रो. इरफान हबीब ने कन्नूर विश्वविद्यालय में आयोजित भारतीय इतिहास कांग्रेस के अधिवेशन में वहां के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के सामने उसी गुस्से का प्रतिनिधित्व किया, जो नागरिकता संशोधन कानून बनने के बाद एएमयू में देखा जा रहा है। राज्यपाल के संबोधन के दौरान एएमयू के कई शिक्षकों ने भी विरोध दर्ज किया था। दिलचस्प पहलू यह भी है कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और प्रो. इरफान हबीब दोनों ‘अलीग बिरादरी’ से हैं।
कन्नूर विश्वविद्यालय में चल रहे तीन दिवसीय भारतीय इतिहास कांग्रेस के 80 वें अधिवेशन में एएमयू के 30 से अधिक शिक्षक एवं शोध छात्र शामिल हुए हैं। नागरिकता संशोधन कानून से लेकर अन्य विषयों पर विभिन्न विश्वविद्यालय से आए वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। जब राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान कांग्रेस को संबोधित कर रहे थे तो प्रो. इरफान हबीब ने विरोध कर दिया। कन्नूर में मौजूद भारतीय इतिहास कांग्रेस के पूर्व सचिव व एएमयू के इतिहासकार प्रो. इसरत आलम का कहना है कि इतिहास कांग्रेस का कई प्रदेशों में आयोजन हो चुका है। उसमें राज्यपाल एवं अन्य महत्वपूर्ण लोग शामिल हुए लेकिन कभी विवाद नहीं हुआ। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान शैक्षणिक कार्यक्रम में राजनीतिक तकरीर कर रहे थे। कन्नूर में मौजूद एएमयू के डॉ. शमीम अख्तर ने बताया कि अधिवेशन में कुछ लोगों ने एएमयू में छात्रों पर लाठीचार्ज और बल प्रयोग का मुद्दा यह कहते हुए उठाया था कि आप उस यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र हैं।
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भारतीय इतिहास कांग्रेस में शामिल शिक्षक
प्रो. इरफान हबीब, प्रो. शिरीन मूसवी, प्रो. इसरत आलम, प्रो. अली नदीम रिजावी, डॉ. शमीम अख्तर, डॉ. जी रजा, डॉ. रुकैय्या, प्रो. समीर हसन, डॉ. शादाब बानो, डॉ. नजर, डॉ. मिन्हाज, डॉ. तौसीफ, डॉ. मृदुला, डॉ. शिवांगनी, डॉ. अरशिया, डॉ. विनोद कुमार आदि प्रमुख हैं।
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एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं केरल के राज्यपाल
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ के सचिव और अध्यक्ष रह चुके हैं। वह अपने जमाने के मजबूत छात्र माने जाते हैं। 1972-73 में सचिव थे। 1974 में छात्र संघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उनके जमाने में 1972 में एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर जबर्दस्त आंदोलन हुआ था, जिसका नेतृत्व उन्होंने किया था। पुराने लोग आज भी उस आंदोलन को याद करते हैं। वहीं, प्रो. इरफान हबीब एएमयू के छात्र व शिक्षक रह चुके हैं। दो अलीग यानी आरिफ मोहम्मद खान और प्रो. इरफान हबीब के बीच वैचारिक टकराव को लेकर कैंपस में चर्चा का बाजार गरम है।
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