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अलीगढ़ : सिर्फ मुद्दों से ध्यान हटाने का षड़यंत्र है हिजाब प्रकरण

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की एक छात्रा को सोशल मीडिया पर पीतल का हिजाब पहनाए जाने के प्रकरण को एएमयू के छात्र नेताओं ने भाजपा की सोची समझी साजिश करार दिया है। छात्र नेताओं ने इसे देश के अन्य मुद्दों से ध्यान हटाने का एक षड्यंत्र बताया है। वहीं, एएमयू के छात्र रह चुके भाजपा के प्रवक्ता ने इसे छात्रों नेताओं के दोहरे मापदंड का नमूना बताया है।
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छात्र नेता अकरम कादरी का कहना है कि हिजाब मुद्दे की आड़ में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण विषय हैं, जो दब गए हैं। कानपुर में 30 लाख का फिरौती कांड चर्चा में नहीं है। पांच वर्ष की एक बच्ची के साथ एक दबंग व्यक्ति ने दुष्कर्म किया। इसके अलावा राजस्थान में चुनी हुई सरकार गिराने के षड्यंत्र में एक नेता का ऑडियो टेप वायरल हो रहा है, वह भी चर्चा में नहीं लाया जा रहा। बिहार में जो पुल गिरा है, वह मुद्दा भी खत्म हो गया है। यह कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर बात होनी चाहिए, चर्चा होनी चाहिए लेकिन जानबूझकर इन पर पर्दा डालने के लिए हिजाब को आगे ला दिया गया।
एएमयू छात्र संघ के पूर्व कैबिनेट सदस्य जमाल अख्तर का कहना है कि इस समय देश में कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले प्रकाश में आ रहे हैं। लेकिन उन पर पर्दा डाल दिया जा रहा है। इससे पहले भी जब गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी में भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आने को था, तब जानबूझकर भाजपा के संगीत सोम ने ताजमहल का मुद्दा उछाल दिया। यह भाजपा का आजमाया हुआ दांव है। जनता को इसे अब समझ जाना चाहिए।
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छात्र नेता मोहम्मद शिकोह का कहना है कि समस्याएं किस संस्थान में नहीं होती। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ऐसा नहीं है कि छात्राओं ने पहले अपनी शिकायत दर्ज न कराई हो। मुस्लिम छात्राओं ने अपने साथ हुए खराब व्यवहार की शिकायत विवि के वुमन सेल, प्राक्टर ऑफिस, कुलपति कार्यालय सभी में दर्ज कराई हैं। मौजूदा समय में जो छात्रा है, इन्हें अपनी बात विश्वविद्यालय में और पुलिस के समक्ष कहने का पूरा अधिकार है। लेकिन भाजपा के कुछ नेता जानबूझकर इसे सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं। जिससे कि उनकी ध्रुवीकरण की राजनीति फलती फूलती रहे।
आखिर छात्रा को क्यों जाना पड़ा पुलिस के पास ?
भाजपा के प्रवक्ता और एएमयू से मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर चुके डॉक्टर निशित शर्मा का कहना है कि आखिरकार छात्रा को पुलिस के पास जाने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा? क्यों विश्वविद्यालय में उसकी बात नहीं सुनी गई? छात्रा को लगातार धमकियां मिल रही हैं? दोष सिर्फ इतना है कि उसने नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में अपनी बात कह दी? जबकि किसी व्यक्ति को किसी भी मुद्दे के पक्ष या विपक्ष में अपनी राय रखने का अधिकार है। कुछ छात्र नेता जो इस मुद्दे पर आरोपी के खिलाफ मौन हैं, वह स्वयं महिलाओं के प्रति हिंसा में गिरफ्तार हो चुके हैं और जेल भी जा चुके हैं। ऐसे में वह किस नैतिकता के आधार पर इस मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं।
इस पूरे प्रकरण को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन बेहद गंभीर है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है, जो अपनी जांच रिपोर्ट कुलपति को सौंपेगी। इसके अलावा आरोपी को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। प्रकरण की जल्द से जल्द जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
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- प्रो. शाफे किदवई, एमआईसी जनसंपर्क विभाग एएमयू
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