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नुमाइश में लुभा रहे मिट्टी के प्रेशर कुकर व वाटर कूलर

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मिट्टी से बने कूकर, तवा, हॉटपॉट, ग्लास व अन्य सामान। - फोटो : CITY OFFICE
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दीपक शर्मा
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मानव सभ्यता के साथ ही मिट्टी के बर्तनों का सफर शुरू हुआ था। समय के साथ इन मिट्टी के बर्तनों की जगह स्टील, एल्युमीनियम और पीतल के बर्तनों ने जगह ले ली। लेकिन तकनीकी के इस दौर में मिट्टी के बर्तनों की झलक राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी के शिल्पग्राम में देखी जा सकती है। यहां पर मिट्टी से बने प्रेशर कुकर, वाटर कूलर, तवा, थाली, कटोरी, हॉटपॉट, गिलास, कप आदि क्राकरी की पूरी रेंज है, जो लोगों को लुभा रही है।
मिट्टी के बर्तन विक्रेता असलम निवासी खुर्जा कहते हैं कि कोरोना महामारी के दौरान उनके पास कई फोन आए, ज्यादातर का सवाल मिट्टी की क्राकरी को लेकर था। इसी मांग को देखते हुए मिट्टी से निर्मित इन बर्तनों को तैयार करवाया। इसके बाद अलीगढ़ की प्रदर्शनी में पहली बार स्टॉल लगाया है। लोग खूब पसंद कर रहे हैं। असलम ने बताया कि मिट्टी के बर्तन इंडक्शन चल्हे पर भी काम करते हैं। लेकिन मिट्टी का तवा काम नहीं करता, क्योंकि इसकी नीचे की सतह गोलाकार है। इसके अलावा अन्य सभी बड़े बर्तन इंडक्शन चूल्हे पर काम करते हैं। इन बर्तनों की कीमत 50- 60 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक है। मिट्टी के प्रेशर कुकर के साथ अंगीठी दी जा रही है, ताकि खाना पकाने के बाद उसे गर्म रखा जा सके।
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इन बर्तनों में खाना पकाने के फायदे
मलखान सिंह जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. यशपाल रावल कहते हैं कि मिट्टी के बने बर्तनों में खाना पकाने से भोजन के पोषक तत्व नष्ट नहीं होते। गैस अपच आदि की समस्या दूर होती है। इन बर्तनों में हल्की आंच पर खाना बनाया जाता है, जो सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। इन बर्तन में बनाई गई दाल, सब्जी आदि में सौ फीसदी माइक्रो न्यूट्रीएंट्स मौजूद रहते हैं। यही वजह है कि अब डाइटीशियन और न्यूट्रीशियन भी लोगों को मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने की सलाह देने लगे हैं। सेहत के लिहाज से लोग भी इनका इस्तेमाल करने लगे हैं।
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