दूसरा चरण : विधिक नोटिस और मुनादी
विधिक नोटिस जारी किए जाएंगे और मुनादी की जाएगी। ताकि अतिक्रमणकारी खुद ही अपना अतिक्रमण हटा लें। नोटिस की अवधि खत्म होने से पहले पूरे इलाके में ढोल-नगाड़ों के साथ बाकायदा मुनादी कराई जाएगी। इसके साथ ही, स्थानीय थानों में अतिक्रमणकारियों के साथ बैठक कर उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से कब्जा हटाने को समझाया जाएगा।
तीसरा चरण : बुलडोजर कार्रवाई और वीडियोग्राफी
तय समय सीमा के भीतर यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो नगर निगम की टीम, मजिस्ट्रेट और भारी पुलिस बल (महिला पुलिसकर्मियों सहित) के साथ मौके पर पहुंचेगी। इसके बाद बुलडोजर और नगर निगम के उपकरणों व लेबर की मदद से अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया जाएगा। इस दौरान जब्त किए गए सामान की सूची बनाकर उसे नगर निगम के सरकारी स्टोर में सुरक्षित रख दिया जाएगा। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी।
दोबारा कब्जा किया तो खैर नहीं, थानेदारों की होगी जिम्मेदारी
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि प्रशासन ने इस बार दोबारा अतिक्रमण की समस्या से निपटने का भी पुख्ता इंतजाम किया है। अभियान खत्म होने के बाद उस पूरे क्षेत्र की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी संबंधित थाने को सौंप दी जाएगी। इसके बाद यह सुनिश्चित करने की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस और थाने की होगी कि उस जगह पर दोबारा अवैध कब्जा न होने पाए। यदि कोई दोबारा कब्जा करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह रहेगी जिम्मेदारी
नगर आयुक्त स्वयं इस पूरे अभियान के नोडल अधिकारी होंगे और हर हफ्ते प्रोग्रेस रिपोर्ट की समीक्षा करेंगे। सहायक नगर आयुक्त सर्वे करने, नोटिस भेजने, लेबर और बुलडोजर आदि की व्यवस्था करने का जिम्मा संभालेंगे। पुलिस क्षेत्राधिकारी मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस फोर्स का इंतजाम करेंगे। मजिस्ट्रेट अभियान के दौरान मौके पर किसी भी प्रकार के विरोध, विवाद या प्रशासनिक गतिरोध को संभालने के लिए तैनात रहेंगे।