पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विमल कुमार गुप्ता का स्थानांतरण संयुक्त निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, मुरादाबाद मंडल में हो गया है। सूचना आने के बाद डॉ. विमल कुमार गुप्ता का कहना है कि एक ठेकेदार के इशारे पर उनके खिलाफ षडयंत्र चल रहा है। सेवानिवृत्ति के 8 महीने पहले उनका स्थानांतरण कर दिया गया।
सोमवार को प्रदेश के प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के 21 अधिकारियों का तबादला किया गया। अलीगढ़ में दो लोग शामिल है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. अद्वैत बहादुर सिंह को डॉ. विमल कुमार गुप्ता के स्थान पर उसी चिकित्सालय का मुख्य चिकित्सा अधिकारी नियुक्त किया गया है। हालांकि, 20 जून को डॉ. विमल कुमार गुप्ता को हटाकर डॉ. अद्वैत बहादुर सिंह को प्रभार दे दिया गया था। उससे संबंधित आदेश शासन द्वारा आज जारी किया गया है। वहीं करीब साढ़े 61 साल के डॉ. विमल कुमार गुप्ता का स्थानांतरण मुरादाबाद मंडल में संयुक्त निदेशक के पद पर किया गया है। अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अलीगढ़ मंडल डॉ. वीपी सिंह ने स्थानांतरण एवं नई तैनाती की पुष्टि की।
राज्यमंत्री अतुल गर्ग प्रकरण में गिरी थी डॉ. विमल पर गाज
प्रदेश सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग के निरीक्षण के दौरान लापरवाही के मामले में पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विमल कुमार गुप्ता पर गाज गिरी थी।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग 29 मई को पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उसी दौरान एक महिला उनका पैर पकड़कर अपनी मां का उपचार कराने की गुहार लगाई थी। बावजूद इसके इमरजेंसी के स्वास्थ्यकर्मियों ने घायल महिला को उपचार देने के बदले दूसरे जगह जाकर उपचार कराने की बात कहकर टरका दिया। इस घटना के बाद ही तय हो गया था कि किसी न किसी पर गाज गिरना तय है। इस मामले में सीएमएस डॉ. वीपी गुप्ता पर ही गाज गिर गई। डॉ. विमल कुमार गुप्ता का कहना है कि एक ठेकेदार है जिसकी कई कंपनी चलती है। ठेका नहीं दिया तो षडयंत्र कर दिया।
राज्यमंत्री के दौरे के समय डॉक्टर एवं फार्मासिस्ट के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिख कर दिया। लेकिन उसकी सजा हमें दी गई। मैने ऐसा क्या गुनाह कर दिया कि सेवानिवृत्ति के 8 माह पहले मेरा स्थानांतरण कर दिया गया। उनका कहना है कि उन्होंने अस्पताल में मेडिकल कॉलेज के टक्कर का आईसीयू बनवाया। डॉक्टरों की ट्रेनिंग करवाई। सभी मेरे कार्य की तारीफ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वह स्वयं डायबिटीज एवं उनकी पत्नी अस्थमा की मरीज हैं। ठेकेदार के चक्कर में मुझे ही उठाकर फेंक दिया गया।