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छापों के खिलाफ डॉक्टरों का फूटा गुस्सा, एसीएमओ का घेराव

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सीएमओ कार्यालय पर अपनी समस्याओं को रखते आईएमए के पदाधिकारी डॉक्टर। - फोटो : CITY OFFICE
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प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा नर्सिंग होम और क्लीनिक आदि पर की जा रही छापामार कार्रवाई के विरोध में बुधवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों सहित डाक्टरों ने सीएमओ कार्यालय पहुंच कर एसीएमओ का घेराव किया और नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। इस दौरान ज्ञापन सौंपा गया जिसमें डाक्टरों की मांग थी कि डाक्टरों का उत्पीड़न बंद किया जाए और यह छापामार कार्रवाई बंद की जाए। साथ ही नर्सिंग होम में छापामार कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल नहीं किया जाए।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार, सचिव डॉ. सुवेक वार्ष्णेय, कोषाध्यक्ष डॉ. भरत वार्ष्णेय, प्राइवेट डाक्टर्स एसोसिएशन ( पीडीए) के अध्यक्ष डॉ. योगेंद्र द्विवेदी, सचिव डॉ. अनूप कुमार, कोषाध्यक्ष डॉ. आयुष कुमार के नेतृत्व में डाक्टर बुधवार को सीएमओ कार्यालय पहुंचे। यहां पर सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल की अनुपस्थिति में उन्होंने एसीएमओ डॉ. पीके शर्मा से मांग की कि जिन संस्थानों पर भी कार्रवाई हुई है, उसे बिना शर्त वापस लिया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो चिकित्सक सील करने का मौका नहीं देंगे और खुद ही अपने संस्थान बंद करने के लिए बाध्य होंगे। शहर की स्वास्थ्य सेवाओं को सरकार के भरोसे छोड़ देंगे। आक्रोशित डाक्टरों ने एसीएमओ को घेर लिया और विरोध में नारेबाजी तक कर डाली। डाक्टरों ने कहा कि कदम कदम पर झोलाछाप डाक्टर, लैब और अस्पताल खुले हैं। प्रशासन का उनके खिलाफ कार्यवाही नहीं करना संदेह पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी चिकित्सक के यहां पर कोई कमी निकलती है तो उसे कुछ समय देकर सुधारने का नोटिस दिया जा सकता है। संस्थान को सील कर दिया जाता है जो नियम विरुद्ध है। ज्ञापन में मांग की गई है कि डाक्टर के यहां पर छापा मारने से पहले सूचित किया जाए। झोलाछापों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इस अवसर पर आईएमए के डॉ. प्रदीप बंसल सहित, आईएमए, पीडीए के सदस्य डाक्टर्स मौजूद थे।
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कार्रवाई नहीं थमेगी, सही काम वाले परेशान न हों: एसीएमओ
पूरे मामले पर एसीएमओ डॉ. पीके शर्मा ने कहा कि आईएमए और पीडीए के पदाधिकारी आए थे। उन्हें बताया गया कि जो कार्यवाही हो रही है उसमें सबसे ज्यादा छोलाछाप ही हैं। कुछ ऐसे हैं जो होम्योपैथी, यूनानी, आयुर्वेद से हैं और आईसीयू तक चला रहे हैं। ऐसी कार्यवाही से उनको ही फायदा है क्योंकि यह लोग एमबीबीएस के नाम पर जनता को गुमराह करते हैं।
बुधवार को उसी समय रामनगर में सील की गई लाइफ केयर पैथलोजी के संचालक भी आए। उनसे कहा गया कि इनके पास न सर्टिफिकेट है न टेक्नीशियन हैं। जहां तक छापेमारी में प्रशासनिक अधिकारियों के शामिल होने का प्रश्न है तो यहां पर एक्ट में यह प्रावधान है कि जब किसी अल्ट्रासाउंड संचालक के यहां पर छापेमारी होगी तो डीएम स्वयं या उनके स्थान पर उनके द्वारा नामित कोई मजिस्ट्रेट स्तर का अधिकारी टीम में शामिल होगा। डाक्टरों को पूरी तरह आश्वस्त किया है कि जो सही काम कर रहे हैं उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा। अब तक किसी को परेशान किया भी नहीं गया है। जो डाक्टरों के नाम पर अवैध डिग्री और कागजों से डाक्टरी कर रहे हैं उनके खिलाफ ही कार्रवाई की गई है। यह अभियान जारी रहेगा।
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