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अलीगढ़ : लोक अदालत में सुलह-समझौते से निपटाए विवाद

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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में शनिवार को दीवानी सहित सभी न्यायालयों में लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान दीवानी में मेले सरीखा नजारा रहा। सुलह-समझौते से वादों का निस्तारण किया गया। इस मौके पर जिला जज डॉ. बब्बू सारंग ने लोक अदालत का शुभारंभ करते हुए इस आयोजन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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कहा कि सुलह-समझौते से यहां निस्तारित होने वाले वादों में कहीं कोई अपील नहीं होती। इस दौरान कुल 15528 मामलों का निस्तारण कर 302296724 रुपये वसूले गए। इस दौरान सर्वाधिक वाद सीजेएम न्यायालय से निस्तारित किए गए।
इस आयोजन में विभिन्न प्रकार के 6719 मामले सुलह-समझौते से निस्तारित किए गए। जिनमें न्यायालयों द्वारा 21 करोड़ 16 लाख 66 हजार 387 रुपये वसले गए। प्रीलिटिगेशन स्तर पर बैंक ऋण, मोबाइल बिल आदि के 8809 वाद निस्तारित करते हुए 9 करोड़ 6 लाख 30 हजार 337 रुपये वसूले गए।
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इस दौरान जिला जज डॉ.बब्बू सारंग ने एक वाद निस्तारित कर 2500 रुपये अर्थदंड वसूला। एडीजे प्रथम शाहिद रजा ने 3, लल्लू सिंह, पीठासीन अधिकारी, वाणिज्यिक न्यायालय ने 18 वाद निस्तारण कर 28690271 रुपये वसूले।
परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश सुरेंद्र सिंह व अन्य परिवार न्यायालयों ने कुल 136 पारिवारिक वाद निस्तारित किए। विशेष न्यायालय ईसी एक्ट अशोक कुमार ने विद्युत अधिनियम के 310 मामलों का निस्तारण कर 1101000 रुपया अर्थदंड वसूला।
करुणा सिंह, लघुवाद न्यायाधीश ने 6 मामलों का निस्तारण किया। सर्वाधिक 3045 लघु फौजदारी मामलों का निस्तारण कर सीजेएम ऋतु नागर द्वारा 1219150 रुपया अर्थदंड वसूला।
आसिफा राना, सिविल जज(सीडि) ने 83, संदीप तृतीय एसीजेएम ने 497, दीपक मिश्रा पंचम एसीजेएम द्वारा 265, प्रतिभा चौधरी द्वितीय एसीजेएम ने 352, नरेश कुमार दिवाकर सप्तम एसीजेएम, मोहम्मद फिरोज प्रथम एसीजेएम ने 35, अर्शीनूर, सिविल जज(जूडि) खैर ने 141, उत्कर्षा वर्तवाल द्वितीय जेएम ने 140, रईस अहमद पीठासीन अधिकारी अतिरिक्त न्यायालय ने 120।
प्रेम नारायण कुलश्रेष्ठ, द्वितीय विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 311 वादों का निस्तारण किया। इस आयोजन की सफलता पर विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव महेंद्र कुमार द्वितीय ने सभी का आभार व्यक्त किया। आयोजन की सफलता में सोहन लाल, मनोज कुमार, ऋषि कुमार, राहुल कुमार, वीरेन्द्र स्वरूप माथुर, बृजेश कुमार, दिनेश सैनी का सहयोग रहा।
आईटीबीपी डिप्टी कमांडेंट के परिवार को दिलाया 55 लाख हर्जाना
लोक अदालत के तहत मोटर दुर्घटना प्रतिकर ट्रिब्युनल के अध्यक्ष/पीठासीन संजय सिंह प्रथम की अदालत ने इस बार मुकदमे निस्तारित कर फिर प्रदेश की टॉप सूची में स्थान पाया है। ट्रिब्युनल ने कुल 332 वाद निस्तारित करते हुए 11 करोड़, 95 लाख 17 हजार 500 रुपये धनराशि दिलाई गई है और सर्वाधिक 65 लाख रुपये प्रतिकर एवार्ड किया गया। इस दौरान एक आईटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट परिवार को 55 लाख रुपये हर्जाना भी दिलाया गया।
जिला पंचायत परिसर में आयोजित लोक अदालत में पीठासीन अधिकारी संजय सिंह प्रथम ने कहा कि लोक अदालतों का सबसे बड़ा गुण नि:शुल्क व त्वरित न्याय है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का कोई भी नागरिक आर्थिक या किसी अन्य अक्षमता के कारण न्याय पाने से वंचित न रह जाए। इस दौरान कुल 428 मामले चिह्नित किए थे, जिनमें कुल 332 निस्तारित किए गए। पीड़ितों को 11,95,17,500 रुपये दिलाया गया।
ये महत्वपूर्ण मुकदमे निस्तारित किए
इस दौरान 2019 के धनपाल बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के मुकदमे में सबसे कम 10 हजार और 2019 के ऋचा गौड़ बनाम मधुसूदन में सबसे अधिक 65,00,000 लाख रुपये प्रतिकर दिलाया गया। सबसे पुराने 2010 के छोटू बनाम इफको टोकिया जनरल इंश्योरेंस कंपनी मुकदमे में 2,00,000 रुपये दिलाए गए। इसी वर्ष के सबसे नए 2021 मीनादेवी बनाम एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी में 7,40,000 रुपये दिलाए गए।
आईटीबीपी अफसर के अनाथ बच्चों को दिलाया हर्जाना
इस दौरान 2017 के राजकुमारी निर्मल बनाम जाकिर राठी का मुकदमा निस्तारित किया गया। इस मुकदमे में महिला के पति आईटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट कन्हैया लाल निर्मल की 10 दिसंबर 2016 को शेखा झील के निकट दुर्घटना में जख्मी होने पर मौत हुई थी।
इसके बाद से परिवार के सामने जीवन यापन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई थी। बाद में वादिया राजकुमारी का भी देहांत हो गया। अब उनकी दो पुत्री व एक पुत्र अविवाहित हैं। परिवार के हालत बेहद खराब हैं। इस पर उनके वारिसों को अदालत ने 55 लाख रुपये हर्जाना दिलाया। इस मौके पर लेखराज सिंह, शशिकांत त्रिवेदी, जय प्रकाश शर्मा, श्रीकान्त, सरनाम सिंह का सहयोग रहा।
करंट से मृत व्यक्ति की पत्नी को दिलाया पांच लाख रुपये का मुआवजा
राष्ट्रीय लोक अदालत की मंशा को साकार करते हुए स्थायी लोक अदालत की दो सदस्यीय पीठ ने बिजली विभाग की लापरवाही से मृत व्यक्ति की पत्नी को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिलवाया।
मंडनपुर अकराबाद निवासी मोनू कुमार पिछले दिनों अपने घर की छत पर भरा बारिश का पानी निकाल रहे थे। तभी घर से सटे विद्युत पोल से छत पर करंट उतर आया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
उनकी पत्नी पूनम ने यह मामला स्थायी लोक अदालत में लगवाया था। लोक अदालत की दो सदस्यीय पीठ में शामिल सेवानिवृत्त न्यायाधीश उपेंद्र कुमार और वरिष्ठ सदस्य शाजिया सिद्दीकी ने मामले की सुनवाई की। बताया गया कि विद्युत पोल मोनू कुमार के घर की दीवार को स्पर्श करता था।
इसे हटाने के लिए उन्होंने कई बार विद्युत अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मामला स्थायी लोक अदालत में आया, जिसमें सुलह के प्रयास किये गए। लेकिन लोक अदालत ने विद्युत विभाग को इस मामले में दोषी ठहराते हुए विद्युत विभाग को मृतक की पत्नी पूनम को पांच लाख रुपया प्रतिकर धनराशि दिए जाने के आदेश कर समझौते के माध्यम से मामले का निपटारा कराया।
छह दंपती को साथ-साथ भेजा न्यायालय से
अपर न्यायाधीश परिवार न्यायालय गरिमा सिंह की अदालत में काउंसलर योगेश सारस्वत के प्रयास से 6 दंपती को पारिवारिक विवाद में सुलह-समझौत के बाद साथ-साथ विदा किया। अब वे साथ रहने की कसम खाकर गए हैं। इस दौरान गभाना के वीरवती-वेदप्रकाश, बरला के कुसुम-अजीत, चंडौस के साजिदा-इश्तिकार, गभाना के सुमन-अरविंद, छर्रा के जावित्री-संजय व गांधीपार्क के नीरू-नीरज साथ विदा होकर गए।
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