अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की कोर्ट की बैठक में बीस साल पहले गुजरात दंगे के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुआ था। उस समय पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी कुलपति थे। अब नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र के प्रबंधक डॉ. जसीम मोहम्मद ने कुलपति को पत्र लिखकर एएमयू कोर्ट में पारित प्रस्ताव को कार्यवृत्ति से हटाने की मांग की है।
वर्ष 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात के कई शहरों में दंगा भड़का था, जिसमें कई लोगों की जान गई थी। तीन मार्च 2002 को एएमयू कोर्ट की बैठक में एक प्रस्ताव पारित हुआ था। घटना की निंदा की गई थी और केंद्र सरकार से मामले की जांच की मांग की गई थी।
प्रस्ताव में स्थानीय प्रशासन एवं सरकार पर भी सवाल उठाए गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे। हामिद अंसारी एएमयू के कुलपति थे, जो बाद में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष एवं उपराष्ट्रपति भी बने। हामिद अंसारी ने अपनी नई पुस्तक ‘बाई मैनी ए हैप्पी एक्सिडेंट : रीकलेक्शन्स ऑफ ए लाइफ’ में एएमयू कोर्ट में पारित प्रस्ताव का उल्लेख किया है।
एएमयू के पूर्व छात्र एवं नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र के प्रबंधक डॉ. जसीम मोहम्मद ने एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को पत्र लिखकर एएमयू कोर्ट की कार्यवृत्ति से 3 मार्च 2002 को पारित प्रस्ताव को हटाने की
मांग की है। डॉ. जसीम का कहना है कि गुजरात दंगों पर तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के विरुद्ध प्रस्ताव कांग्रेस द्वारा प्रायोजित था।
एएमयू को नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के लिए इस्तेमाल किया गया। कांग्रेस पार्टी द्वारा हामिद अंसारी को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष एवं उप राष्ट्रपति बनाया गया। एएमयू के प्रवक्ता प्रो. शाफे किदवई ने डॉ. जसीम मोहम्मद द्वारा एएमयू वीसी को पत्र लिखे जाने की पुष्टि की।
सांसद बोले.. प्रस्ताव हटना चाहिए
अलीगढ़ के सांसद एवं एएमयू कोर्ट सदस्य सतीश गौतम ने भी एएमयू कोर्ट के मिनट्स से प्रस्ताव को हटाने की वकालत की है। उनका कहना है कि कांग्रेस ने हमेशा लोगों को बांट कर शासन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ सबका विकास एवं सबका विश्वास जीतने का काम कर रहे हैं। हामिद अंसारी बीमार मानसिकता के लोग हैं।