विधानसभा चुनाव में गन्ना किसानों के लिए राजनीतिक दल तमाम दावे-वादे कर रहे हैं। लेकिन जिले के गन्ना किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। दरअसल, जर्जर साथा चीनी मिल गन्ना किसानों के लिए मुसीबत बनी हुई है। पिछले दस तक मिल का संचालन ठप रहा था, पेराई भी तय लक्ष्य के अनुरूप नहीं हो पा रही है।
ऐसे में चीनी मिल के बाहर ठंड में अपनी बारी का इंतजार कर रहे गन्ना किसानों का सब्र टूटने लगा है। कई किसानों ने अपना गन्ना औने-पौने दाम पर चारे के रूप में बेचना शुरू कर दिया है। कई किसानों ने आसपास की मिलों में सरकारी रेट से कम पर गन्ना बेचकर घाटा कम किया है। उनका कहना है कि जब तक यहां पर नई चीनी मिल नहीं लगती है, तब तक हम गन्ने की खेती नहीं करेंगे।
किसानों के मुताबिक, तीन सीजन तक चलने वाली गन्ने की फसल की खेती में एक बीघे में लेबर आदि मिलाकर करीब आठ से नौ हजार रुपये लागत आती है। एक बीघे में करीब 70 से 80 क्विंटल गन्ना पैदा होता है। लेकिन कई वर्षों से साथा चीनी मिल कीजर्जर अवस्था के चलते गन्ने की पेराई में किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इससे आजिज आकर पिछले साल इगलास क्षेत्र के दर्जनों किसानों ने गन्ने की खेती से तौबा कर ली थी। अब कुछ और किसान भी इस राह पर चल निकले हैं। उनका कहना है कि हर साल मेहनत से गन्ने की खेती करो और उसके बाद पेराई के लिए चीनी मिल के चलने का इंतजार करो। पेराई न हो पाए तो उसे औने पौने दामों में बेचो। इससे अच्छा है कि जब तक यहां नई मिल नहीं लग जाती है, तब तक गन्ने की खेती न करें।
- गन्ने का सरकारी रेट 345 रुपये क्विंटल है। पेराई न होने पर अपना गन्ना पास की चीनी मिल में 230 रुपये क्विंटल के भाव से बेचा है। कसम ली है कि जब तक मिल की नई यूनिट नहीं लग जाती है तब तक गन्ने की खेती नहीं करुंगा।
अजय कश्यप, किसान, निवासी गांव अख नगला
-गन्ने की फसल में एक बीघा में आठ से नौ हजार रुपया लागत आती है। मिल न चलने से कई कई दिन इंतजार के चलते ट्रैक्टर का औसतन एक हजार रुपया प्रतिदिन किराया भरना होता है। मैने तो अपनी फसल चारे के रूप में बेच दी है।
रौबी ठाकुर, किसान
- साथा मिल न चलने से घाटा बढ़ रहा था। मिल चलती तो 345 रुपये क्विंटल के रेट मिलते, मगर मिल नहीं चली तो 240 रुपये प्रति क्विंटल में अपनी दस बीघा गन्ने की फसल चारे के रूप में बेच दी। अब नई मिल शुरू होने तक गन्ना नहीं बोऊंगा।
जगवीर सिंह, किसान, गांव दबथला
22 दिनों में सिर्फ 12 दिन ही चल पाई मिल
शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे चली साथा चीनी मिल में शनिवार सायं तक मात्र 63 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई हो सकी है। इसका कारण मिल का लड़खड़ाकर चलना है। बताते चलें कि इस सीजन में मिल में करीब 5.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई होनी है। सात जनवरी से शुरू हुई पेराई के दौरान पिछले 22 दिनों में मिल मात्र 12 दिन ही चली है।
रॉबी ठाकुर।- फोटो : CITY OFFICE