जाने-माने उर्दू लेखक व एएमयू में उर्दू विभाग के शिक्षक डॉ. नादिर अली खान के जनाजे में भीड़ उमड़ पड़ी। जनाजे की नमाज व सुपुर्द-ए-खाक की वजह से एएमयू परिसर में वाहनों की आवाजाही पर पाबंदी लगा दी गई। भीड़ के चलते जनाजे की नमाज एएमयू के एथलेटिक्स मैदान में पढ़ी गई। अमूमन यह नमाज मिंटो सर्किल कब्रिस्तान में पढ़ी जाती है। डॉ. नादिर का बीमारी के कारण शुक्रवार देर रात इंतकाल हो गया था।
डॉ. नादिर अली, सूरा तबलीगी जमात के सदस्य थे। वह अपने बेटे खान मोहम्मद यासिर के साथ अलीगढ़ में रह रहे थे। 16 जून 1931 को रटोली, बागपत में जन्मे डॉ. नादिर अली ने उर्दू पत्रकारिता पर कई पुस्तकें लिखी हैं।
उन्होंने भारत में इस्लामी महत्व के विभिन्न केंद्रों की यात्रा की, जहां उन्होंने शेख उल हदीस मोहम्मद जकारिया अल कांधलवी (1898-1982) और महान समाज सुधारक मौलाना मोहम्मद यूसुफ कांधलवी जैसे प्रख्यात धार्मिक विद्वानों से मुलाकात की।
एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि डॉ. नादिर अली खान एक समर्पित शिक्षक थे, जिन्हें अपने छात्रों के साथ ज्ञान साझा करना पसंद था। उनका निधन विश्वविद्यालय के लिए बड़ी क्षति है। उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद अली जौहर ने कहा कि डॉ. नादिर ने विद्यार्थियों, शोधार्थियों व युवा सहयोगियों का एक दृढ़ समर्पण के साथ मार्गदर्शन किया।
डॉ. नादिर एक प्रसिद्ध लेखक थे, जिन्होंने बड़ी संख्या में साहित्यिक और शैक्षणिक कार्य प्रकाशित किए। वह अपनी पुस्तक ‘ए हिस्ट्री इन उर्दू जर्नलिज्म : (1822-1857, 1991) के लिए प्रसिद्ध हैं। यह पुस्तक नौ अलग-अलग शहरों के समाचार पत्रों की समीक्षा एवं अध्ययन प्रस्तुत करती है। उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक डॉ. राहत अबरार ने कहा कि डॉ. नादिर अली के जनाजे की नमाज में जितनी भीड़ थी, उतनी भीड़ कभी नहीं देखी।
डॉ. नादिर के दामाद रहे तीन राष्ट्रपतियों के स्वास्थ्य सलाहकार
डॉ. राहत अबरार ने बताया कि डॉ. नादिर अली की चार बेटे व दो बेटियां हैं। इनके दामाद डॉ. मोहसिन वली देश की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के स्वास्थ्य सलाहकार रहे हैं।