मुख्य चिकित्सा अधिकारी का दफ्तर राजनीति का अखाड़ा बन गया है। सारे फसाद के जड़ में मलाईदार पद हासिल करने की कोशिश है। यही कारण है कि पिछले दो साल से स्वास्थ्य विभाग अच्छे कामों के बजाय भ्रष्टाचार एवं बेईमानी के कारण ज्यादा चर्चा में रहा। कोविड-19 के दौर में भी कुछ लोग जन सेवा के बदले दूसरे को गिराने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं।
दो दिन पहले सीडीओ अनुनय झा एवं एसीएम रंजीत सिंह की छापेमारी के बाद स्वास्थ्य विभाग सुर्खियों में है। लैपटॉप, डेंगू किट, कारतूस, नकदी एवं कंडोम आदि आपत्तिजनक कुछ सामान बरामद हुए थे। जिन तीन कर्मचारियों के कमरे से आपत्तिजनक सामान बरामद हुए थे, उनको कारण बताओ नोटिस दिया गया है। तीन दिन में जवाब देना है। तीनों कर्मचारियों का स्थानांतरण सीएमओ ऑफिस से बाहर कर दिया गया है। सोमवार को तीनों नई तैनाती स्थल पर ज्वाइन करेंगे। इस घटना के बाद एक बार फिर सेे घपले-घोटाले की नई-पुरानी फाइलों के पन्ने फड़फड़ाने लगे हैं। वहीं, कोरोना संक्रमित मरीजों की पूरी जिम्मेदारी सीएमओ दफ्तर पर ही है।
भरोसेमंद सूत्राें का कहना है कि सारे फसाद के जड़ में मलाईदार पद को हथियाने की ललक है। इसी के चक्कर में विभाग के लोग एक-दूसरे के खिलाफ अधिकारियों की कान भरते हैं। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी का कहना है कि हमारे पास जो संसाधन उपलब्ध है, उसी से काम चलाना है। हां, सावधानी रखनी पड़ेगी। सारे कार्यों पर बारीक नजर बनाए रखना होगा।