समलैंगिक से दोस्ती कर उन्हें एएमयू के विकारुल मुल्क (वीएम) हॉल में बुलाने और आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि ये गिरोह करीब छह महीने से चर्चित डेटिंग एप ग्रिंडर और माई बॉय के जरिये युवकों को निशाना बना रहा था। ये दोनों एप जियो लोकेशन आधारित हैं और उस पर 50 किलोमीटर की रेंज से अपने शिकार की तलाश करते थे और उन्हें वीएम हॉल में बुलाकर वीडियो बनाते थे।
पुलिस के मुताबिक, अब तक इस गिरोह ने पीड़ित के अलावा 25 अन्य लोगों से सात लाख रुपये वसूले हैं। पुलिस ने एएमयू के बीबीए छात्र शहजिल को गिरफ्तार किया है। साथ ही उसके तीन साथियों मन्नान, भोला भाई और ऑगी के अलावा एक अज्ञात के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया।
यह मामला उस समय खुला, जब एएमयू में एमटीएस के पद पर कार्यरत एक कर्मचारी के 19 वर्षीय बेटे ने पुलिस को पूरी घटना बताई। एएमयू प्रबंधन ने पीड़ित की पहचान छिपाने की अपील की है। पीड़ित के मुताबिक 17 अगस्त की शाम करीब 5:30 बजे उसे ग्रिंडर एप से संपर्क कर मिलने के बहाने वीएम हॉल के एक कमरे में बुलाया गया।
वहां पहले से कुछ लोग मौजूद थे। आरोपियों ने उसे जबरन कमरे में रोक लिया और उसके साथ मारपीट की। इसके बाद उसका आपत्तिजनक वीडियो बनाया और उसे वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। यह सिलसिला कई दिन तक चलता रहा।
एक दिन उसके पास से 5600 रुपये इस गिरोह ने छीन लिए। इस तरह वे पीड़ित से 25 हजार रुपये वसूल चुके थे। पीड़ित के पिता को जब शक हुआ तो उन्होंने सख्ती से पूछताछ शुरू की जिसे सुन वे हैरान रह गए। उनके बेटे ने बताया कि आरोपियों के पास उसका एक और वीडियो है जिसमें उससे यह कहलवाया गया कि उसके साथ किसी ने कुछ गलत नहीं किया।
पुलिस का कहना है कि ऐसा आरोपियों ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए किया था। बहरहाल, बेटे से पूरी कहानी सुनने के बाद पिता ने पुलिस से संपर्क किया और शुक्रवार को थाना सिविल लाइन में मुकदमा दर्ज कराया जिसके बाद पुलिस ने साइबर सेल को शामिल करते हुए एक जांच टीम गठित की।
एक शिकायत से खुला ब्लैकमेलिंग का बड़ा जाल
पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो मामला सिर्फ एक पीड़ित तक सीमित नहीं मिला। जांच में सामने आया कि गिरोह इसी तरीके से कई अन्य लोगों को भी निशाना बना चुका था। एक अन्य पीड़ित से 60 हजार रुपये वसूल किए जाने की पुष्टि हुई है। पुलिस के मुताबिक अब तक करीब 25 लोगों से सात लाख रुपये वसूलने की जानकारी मिली है।
26वें मामले में भी वे सफल रहे लेकिन पीड़ित के पिता को शक होने के बाद उनका पर्दाफाश हो गया। पुलिस ने गिरफ्तार छात्र के मोबाइल फोन की जांच की तो 15 अन्य आपत्तिजनक वीडियो मिले। अब इन वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान और उनसे संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि सामने आ सके कि वे भी गिरोह के शिकार हुए हैं या नहीं।
छह महीने से चला रहा था गिरोह
पुलिस के मुताबिक बीबीए छात्र शहजिल करीब छह महीने से ग्रिंडर और माई बॉय एप के जरिये लोगों से संपर्क कर रहा था। इसके बाद उन्हें मिलने के बहाने वीएम हॉल में बुलाया जाता था। कमरे में पहले से मौजूद साथी उन्हें रोक लेते थे। वीडियो बनाने के बाद उसे वायरल करने की धमकी देकर रकम की मांग की जाती थी। पुलिस के अनुसार शहजिल को इस तरह ब्लैकमेलिंग का विचार दिल्ली-एनसीआर में हुई एक अन्य ठगी की घटना की जानकारी मिलने के बाद आया। इसके बाद उसने कुछ बाहरी युवकों के साथ मिलकर योजना बनाई और लोगों को निशाना बनाना शुरू किया।
खंगाले जा रहे मोबाइल और बैंक खाते
पुलिस अब गिरोह के मोबाइल चैट, यूपीआई लेनदेन, बैंक खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सात लाख रुपये की रकम किन खातों में पहुंची और गिरोह में कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस अन्य संभावित पीड़ितों की भी तलाश कर रही है।
17 साल पहले भी सुर्खियों में रहा एएमयू, बन गई फिल्म
अलीगढ़ और समलैंगिकता से जुड़े मामलों का संदर्भ पहले भी सुर्खियों में रहा है। करीब 17 साल पहले एएमयू से जुड़ा एक मामला देशभर में चर्चित हुआ था। बाद में इसी पृष्ठभूमि पर अलीगढ़ फिल्म भी बनी। लंबे समय बाद एएमयू परिसर से जुड़ा यह नया मामला सामने आने के बाद पुराना संदर्भ एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, मौजूदा मामले में पुलिस की जांच का केंद्र ग्रिंडर और माई बॉय ऐप के जरिए लोगों को फंसाकर आपत्तिजनक वीडियो बनाने, ब्लैकमेल करने और रकम वसूलने का कथित गिरोह है।
यह जानना है जरूरी
- फोटो : एआई
गिरोह से जुड़े मोबाइल चैट, डिजिटल लेनदेन और डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच की जा रही है। बरामद वीडियो के आधार पर अन्य पीड़ितों से संपर्क कर उन्हें शिकायत के लिए आगे लाने का प्रयास है, ताकि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सके। -सर्वम सिंह, सीओ तृतीय
जानना जरूरी
समलैंगिकता अपराध नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है।
ब्लैकमेलिंग अपराध है
किसी को फंसाकर उसके निजी वीडियो/फोटो बनाना, धमकी देकर रकम वसूलना गंभीर अपराध है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई होती है।