मडराक क्षेत्र के गांव कोठिया में 22 जून को एक ही खानदान के दो पक्षों में बंटवारे के बाद मकान की नीव भरने को लेकर हुए विवाद में पथराव हो गया था। इस विवाद की सूचना पर पहुंची पीआरवी एक पक्ष से हीरा सिंह व दूसरे पक्ष से वीरेंद्र को गिरफ्तार कर थाने ले आई। दोनों ओर से अलग-अलग भाजपा नेताओं ने पैरवी शुरू कर दी। आरोप लगा कि थाने में पुलिस द्वारा बुजुर्ग हीरा सिंह को दरोगा ने पीटा। बाद में दोनों को शांति भंग में पाबंद किया गया और फिर मंडल महामंत्री अनिल तोमर की पैरवी पर दोनों में सुलहनामा भी हुआ। बस यही भाजपा नेताओं में विवाद की जड़ बना है। गत दिनों वायरल ऑडियो भी उसी कड़ी का हिस्सा है। इसके अलावा कीरतपुर के एक व्यक्ति से 8 हजार रुपये घूस में वसूली एवं कोटेदार के मामले ने विवाद को भड़काने में पेट्रोल का काम किया है।
महानगर उपाध्यक्ष कुशलपाल सिंह एवं मडराक मंडल के महामंत्री अनिल तोमर के बीच विवाद से भाजपा की राजनीति गरमा गई है। दोनों नेताओं में से एक सांसद सतीश गौतम तो दूसरा कोल विधान सभा क्षेत्र के विधायक अनिल पाराशर के प्रशंसक हैं। इस ऑडियो वार के बाद भाजपा की आंतरिक खेमेबंदी भी उजागर हो गई है। कोठिया के झगड़े और सुलहनामे के बाद मामला भड़क गया है। यह भी आरोप लग रहे हैं कि कीरतपुर के एक व्यक्ति से 8 हजार रुपये घूस के रूप में वसूले गए। कीरतपुर के व्यक्ति का आपस में झगड़ा हुआ था। विवाद की जड़ में एक कोटेदार भी है, जिस पर जनता के बीच ठीक से राशन वितरण नहीं करने का आरोप लगा था। एक पक्ष बचाव तो दूसरा विरोध में खड़ा हो गया। कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि विवाद के दौरान कुछ जन प्रतिनिधियों के पास भी मामला पहुंचा था। जन प्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी का कारण भी यही माना जा रहा है।
अनिल तोमर का कहना है कि दो महीने पहले कीरतपुर में गोली चली थी। दरोगा ने तमंचा बरामदी के लिए दबाव बनाया था। कुछ लोगों ने उल्टा दरोगा पर आरोप लगा दिया। अनिल कहते हैं कि गडराना में ठाकुर एवं अनुसूचित जाति के बीच मुकदमा दर्ज हुआ था। उस मामले में दोनों पक्ष की ओर से 20-25 लोग जेल गए हैं। वहीं कुशलपाल सिंह का कहना है कि कोठिया बुजुर्ग की पिटाई व कीरतपुर के एक व्यक्ति से 8 हजार रुपये की शिकायत को लेकर 20-20 लोग उनके पास आए थे। इसी को लेकर दरोगा से बात की। अनिल तोमर दरोगा को बचाने में लगे हैं। कल सांसद सतीश गौतम आ रहे हैं। वहीं पर जाकर लोग अपनी समस्या रखेंगे। भाजपा के महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत का कहना है कि वह इस मामले को लेकर गंभीर हैं। सच्चाई का पता लगाने के लिए जांच करा रहे हैं।
वाकया 22 जून का है। गांव कोठिया के हीरा सिंह व वीरेंद्र खानदानी हैं। इनमें नीव भरने को लेकर विवाद में पथराव हुआ। सूचना पर पीआरवी दोनों को पकड़ लाई। इनके बेटे भाग गए। पुलिस ने दोनों को शांति भंग में पाबंद किया। दोनों ओर से सिफारिशें भी आई थीं। बाद में दोनों में अनिल तोमर ने समझौता करा दिया। इसी बात पर कुशलपाल जी मुझसे नाराज हो गए कि मेरी बात क्यों नहीं रखी गई। इस मामले में हीरा सिंह पर पहले भी आपराधिक मुकदमे हैं। वहीं बात कीरथपुर की करें तो जिस पक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ, उस पक्ष की ओर से मुकदमा कराने के लिए प्रयास किए गए। बात नहीं बनी तो नाराजगी हो गई। इसके सिवाय कोई बात नहीं है।
-नरेंद्र सिंह, दरोगा मडराक थाना